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US Iran War 2026 : अमेरिका-ईरान युद्ध का डिजिटल खतरा, लाल सागर में कटा इंटरनेट केबल तो ठप हो जाएगी दुनिया

US Iran War 2026 : मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब केवल ज़मीनी जंग तक सीमित नहीं रह गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध का अगला बड़ा शिकार समुद्र के नीचे बिछा ‘अंडर-सी इंटरनेट केबल’ का जाल हो सकता है। कुछ अपुष्ट खबरों के अनुसार, ईरान ने लाल सागर और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में बिछी इन महत्वपूर्ण केबल्स को नुकसान पहुँचाने के संकेत दिए हैं। हालांकि ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन युद्ध की संवेदनशीलता को देखते हुए वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक के ठप होने का डर बढ़ गया है। यह केबल्स दुनिया के एक महाद्वीप को दूसरे से जोड़ने वाली डिजिटल जीवनरेखा हैं।

होर्मुज और लाल सागर का नाजुक भूगोल: केबल्स को डैमेज करना हुआ आसान

जंग के केंद्र में मौजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहाँ समुद्र की गहराई कई स्थानों पर मात्र 200 फीट है। इतनी कम गहराई पर बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स को आधुनिक पनडुब्बियों या विशेष उपकरणों के जरिए एक्सेस करना और उन्हें काटना दुश्मनों के लिए काफी आसान हो जाता है। यदि युद्ध के दौरान ये केबल्स जानबूझकर या दुर्घटनावश क्षतिग्रस्त होती हैं, तो एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच का डेटा प्रवाह पूरी तरह बाधित हो सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में इन केबल्स की मरम्मत करना लगभग असंभव होगा, जिससे महीनों तक संचार ठप रह सकता है।

पिछला कड़वा अनुभव: 2024 में हूती हमलों से धीमी हुई थी इंटरनेट की रफ्तार

इंटरनेट केबल्स पर हमले का खतरा केवल काल्पनिक नहीं है। साल 2024 के शुरुआती महीनों में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के दौरान लाल सागर में कई प्रमुख केबल्स को नुकसान पहुँचा था। उस समय इस क्षति के कारण एशिया और अफ्रीका के कई देशों में इंटरनेट की स्पीड में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दौरान भी यह देखा गया था कि गहरे समुद्र में केबल्स की रिपेयरिंग एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। वर्तमान में जारी पूर्ण विकसित युद्ध जैसी स्थिति इस खतरे को और भी अधिक वास्तविक और विनाशकारी बना देती है।

समुद्र के नीचे बिछी इन केबल्स की ताकत: क्यों हैं ये इतनी खास?

इंटरनेट केबल्स को अत्यधिक कठोर परिस्थितियों को झेलने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इनकी कुछ प्रमुख खूबियाँ निम्नलिखित हैं:

  • प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा: ये केबल्स सुनामी, समुद्री भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और शार्क जैसे समुद्री जीवों के हमलों को सहने में सक्षम हैं।

  • उच्च क्षमता: इन्हें हाई बैंडविड्थ और लो लैटेंसी (Low Latency) के लिए बनाया जाता है, जिससे डेटा पलक झपकते ही दुनिया के दूसरे छोर तक पहुँच जाता है।

  • मजबूत बनावट: स्टील और कॉपर की सुरक्षा परतों के कारण इनकी ‘टेन्सिल स्ट्रेंग्थ’ बहुत अधिक होती है, जिससे इन्हें खींचकर तोड़ना कठिन होता है।

  • किफायती माध्यम: सैटेलाइट इंटरनेट की तुलना में समुद्र के नीचे से डेटा भेजना काफी सस्ता और विश्वसनीय होता है।

केबल्स का कमजोर पक्ष: मरम्मत और जासूसी की बड़ी चुनौती

अत्यधिक मजबूत होने के बावजूद, इन केबल्स की अपनी कुछ कमजोरियाँ भी हैं जो युद्ध के समय गंभीर हो जाती हैं:

  • मरम्मत में देरी: अगर एक बार केबल कट जाए, तो विशेष जहाजों की मदद से इसे ठीक करने में हफ्तों या महीनों लग जाते हैं।

  • स्थापना की जटिलता: इन्हें समुद्र के तल पर बिछाना एक लंबी और खर्चीली प्रक्रिया है।

  • भूस्खलन का खतरा: समुद्री मडस्लाइड (कीचड़ खिसकना) जैसी घटनाओं से ये केबल्स अक्सर नाकाम हो जाती हैं।

  • जासूसी का अड्डा: युद्ध के समय इन केबल्स में सेंध लगाकर डेटा चोरी या जासूसी की जा सकती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

क्या सैटेलाइट इंटरनेट बनेगा विकल्प?

यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध लंबा खिंचता है और समुद्री केबल्स को निशाना बनाया जाता है, तो दुनिया को संचार के लिए सैटेलाइट आधारित इंटरनेट (जैसे स्टारलिंक) पर निर्भर होना पड़ सकता है। हालांकि, यह माध्यम वर्तमान केबल सिस्टम जितना तेज और सस्ता नहीं होगा। वर्तमान में दुनिया का 95% से अधिक डेटा इन्हीं समुद्री तारों के जरिए सफर करता है, इसलिए इनका सुरक्षित रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है।

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