US Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बार फिर परमाणु हमले की आशंकाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस बहस के केंद्र में ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित पिकेक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) नामक एक कथित भूमिगत परमाणु ठिकाना है। पूर्व फॉक्स न्यूज होस्ट टकर कार्लसन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े बयानों के बाद इस संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यहां परमाणु हमला होता है, तो उसका रेडियोधर्मी प्रभाव भारत सहित आसपास के देशों तक पहुंच सकता है या नहीं।
क्या है ईरान का पिकेक्स माउंटेन परमाणु ठिकाना?
रिपोर्टों के अनुसार, पिकेक्स माउंटेन ईरान के नतांज परमाणु परिसर के आसपास स्थित एक अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। दावा है कि इसका निर्माण जमीन से करीब 328 फीट यानी लगभग 100 मीटर गहराई में मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे किया गया है। इसकी गहराई और सुरक्षा व्यवस्था के कारण इसे नष्ट करना किसी भी सैन्य शक्ति के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।

क्या पारंपरिक बंकर बस्टर बम इसे नष्ट कर सकते हैं?
इस ठिकाने को लेकर सबसे अधिक चर्चा अमेरिकी GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बंकर बस्टर बम की क्षमता पर हो रही है। उपलब्ध दावों के मुताबिक, इसकी भेदन क्षमता भूमिगत ठिकानों के खिलाफ सीमित है। हालांकि, किसी संरचना को नष्ट करने की वास्तविक क्षमता चट्टानों की बनावट, सुरक्षा व्यवस्था और हथियार के इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इसे नष्ट करने के लिए केवल परमाणु हथियार ही विकल्प हैं।

भारत तक पहुंच सकता है रेडियोधर्मी विकिरण?
पिकेक्स माउंटेन और भारत के बीच लगभग 2,500 किलोमीटर की दूरी बताई जाती है। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, यदि किसी परमाणु विस्फोट के बाद रेडियोधर्मी कण वातावरण में फैलते हैं, तो उनका रास्ता हवा की दिशा और गति पर निर्भर करेगा। पूर्व दिशा में हवाएं चलने की स्थिति में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जाती है।
पंजाब, राजस्थान और गुजरात तक पहुंच सकता है असर?
संभावित परिस्थितियों में उत्तर-पश्चिम भारत के पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और गुजरात तक रेडियोधर्मी कण पहुंचने की चर्चा की गई है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव विस्फोट की प्रकृति, ऊंचाई, मौसम और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। दूरी बढ़ने के साथ कणों का फैलाव और सांद्रता बदल सकती है। इसलिए भारत में रेडिएशन के स्तर को लेकर अभी निश्चित दावा करना उचित नहीं है।

बारिश से बन सकते हैं रेडियोधर्मी हॉटस्पॉट?
परमाणु विस्फोट के बाद वातावरण में मौजूद रेडियोधर्मी कण बारिश के साथ जमीन पर जमा हो सकते हैं। इसे रेडियोधर्मी फॉलआउट कहा जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ सीमित इलाकों में स्थानीय प्रदूषण के क्षेत्र बन सकते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह मौसम, हवा और रेडियोधर्मी पदार्थों की मात्रा पर निर्भर करेगा।
टकर कार्लसन के परमाणु हमले वाले दावे से बढ़ी बहस
पूर्व फॉक्स न्यूज होस्ट टकर कार्लसन ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन ईरान के पिकेक्स माउंटेन पर परमाणु हमला करने पर विचार कर सकता है। कार्लसन के मुताबिक, ऐसा कदम क्षेत्रीय संघर्ष को वैश्विक युद्ध में बदल सकता है। हालांकि, उनके दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है
ट्रंप ने परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से किया इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अक्टूबर 2026 को न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने पिकेक्स माउंटेन को निशाना बनाने की संभावना जरूर जताई थी, लेकिन परमाणु बम के इस्तेमाल से इनकार किया था। इसलिए संभावित सैन्य हमले और परमाणु हमले को एक ही बात मानना सही नहीं होगा।
विशेषज्ञों ने बताई वैश्विक संघर्ष की आशंका
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान पर परमाणु हमला होने की स्थिति में मध्य पूर्व का संकट और गंभीर हो सकता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु अप्रसार व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका होगी। हालांकि, तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत या दूसरे देशों की परमाणु प्रतिक्रिया को निश्चित परिणाम बताना उचित नहीं है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल पर पड़ सकता है असर
भारत के लिए इस संकट का एक बड़ा पहलू ऊर्जा सुरक्षा है। मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं। तेल की कीमतों में तेजी आने पर भारत में पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

