US Japan trade deal: वॉशिंगटन डी.सी.: टैरिफ विवादों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा आर्थिक कदम उठाते हुए अमेरिका-जापान व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। व्हाइट हाउस द्वारा गुरुवार को आधिकारिक रूप से यह घोषणा की गई कि यह समझौता साइन होते ही लागू भी कर दिया गया है। इस समझौते के तहत जापान से अमेरिका को होने वाले अधिकांश आयातों पर अब 15 प्रतिशत टैरिफ लगेगा।

समझौते के मुख्य बिंदु:
550 बिलियन डॉलर का जापानी निवेश अमेरिका में किया जाएगा।ट्रांसपोर्ट, एविएशन और एग्रीकल्चर सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा।अमेरिका जापानी बाजारों में मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, फूड और एनर्जी सेक्टर में विस्तार करेगा।जापान, अमेरिका से 8 बिलियन डॉलर मूल्य के एग्रीकल्चरल उत्पाद खरीदेगा, जिसमें चावल और सोयाबीन प्रमुख हैं।जापान अमेरिका में बने कमर्शियल प्लेन और रक्षा उपकरणों की खरीद करेगा।

15% टैरिफ किन आयातों पर?
राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह टैरिफ ऑटोमोबाइल, एविएशन, मेडिसिन और प्राकृतिक संसाधनों को छोड़कर अन्य सभी जापानी उत्पादों पर लागू होगा। इससे अमेरिकी कंपनियों को घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की संभावना है।
रोजगार और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
समझौते के तहत जापान द्वारा अमेरिका में किया गया 550 अरब डॉलर का निवेश न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि नौकरी के नए अवसरों का भी सृजन करेगा। खासतौर पर युवाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम अमेरिका की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सहयोग प्रदान करेगा।
अमेरिका-जापान संबंधों में नया अध्याय
व्हाइट हाउस के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से जारी बयान में कहा गया है कि यह व्यापार समझौता अमेरिका और जापान के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देगा। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा।
व्यापार घाटा कम करने की दिशा में पहल
यह समझौता अमेरिका के लिए न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके ज़रिए द्विपक्षीय व्यापार घाटा भी कम होगा। अमेरिकी कंपनियों को जापान जैसे बड़े और विकसित बाजार में प्रत्यक्ष अवसर मिलेंगे, जिससे उनके राजस्व में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।
अमेरिका-जापान व्यापार समझौता राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार नीति में एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। जहां एक ओर यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश को बढ़ावा देगा, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक व्यापार समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।










