US Sanctions Golden Global Bank : अमेरिका ने तुर्की के गोल्डन ग्लोबल बैंक पर लगाया प्रतिबंध, ईरान को बड़ा झटका

अमेरिका ने तुर्की के गोल्डन ग्लोबल बैंक पर ऐसा शिकंजा कसा है, जिसका सीधा असर ईरान की वित्तीय व्यवस्था पर पड़ सकता है। वॉशिंगटन का आरोप है कि बैंक ने ईरान से जुड़े करोड़ों डॉलर के लेनदेन में मदद की। आखिर बैंक पर कार्रवाई क्यों हुई और इससे ईरान को कितना नुकसान होगा?

US Sanctions Golden Global Bank : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान की आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों पर दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिका का लक्ष्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग-थलग करना और उसकी आय के प्रमुख स्रोतों पर रोक लगाना है। इसी अभियान के तहत अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को तुर्की के एक प्रमुख वित्तीय संस्थान के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है। इस कार्रवाई से ईरान के साथ जुड़े वित्तीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगने की संभावना जताई जा रही है।

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तुर्की के गोल्डन ग्लोबल बैंक पर प्रतिबंध

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, इस्तांबुल स्थित ‘गोल्डन ग्लोबल यतिरिम बैंकसी’ और उसकी दो सहायक कंपनियों को प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि बैंक ने ईरानी तेल से होने वाली कमाई को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के जरिए स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका का कहना है कि इस नेटवर्क के माध्यम से ईरान के तेल राजस्व को दूसरे देशों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही थी।

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चीन से आने वाले तेल के पैसे का इस्तेमाल

अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, गोल्डन ग्लोबल बैंक की स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य चीन को बेचे जाने वाले ईरानी तेल से मिलने वाले राजस्व को तुर्की पहुंचाना था। आरोप है कि चीन से प्राप्त धन को तुर्की में नकदी और सोने में परिवर्तित किया जाता था। इसके बाद इस रकम को ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचाने में मदद मिलती थी। अमेरिका ने इसे ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार को सहारा देने वाली वित्तीय गतिविधि बताया है।

ईरानी संस्थानों और IRGC से संबंध का आरोप

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बैंक ने जानबूझकर ईरानी वित्तीय संस्थानों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े खातों को कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराईं। अमेरिकी ट्रेजरी ने बैंक के नेटवर्क को तुर्की के कारोबारी सितकी अयान से भी जोड़ा है। अयान पर पहले से ही ईरानी तेल राजस्व को गुप्त तरीके से स्थानांतरित करने वाले नेटवर्क में शामिल होने के आरोप लग चुके हैं और उन्हें 2022 में अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था।

‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत दूसरी बड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत दूसरी बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। इससे करीब एक सप्ताह पहले अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात में एक मिस्र के बैंक के परिचालन को सीमित किया था। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की पहचान करना और उसकी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को रोकना है।

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स्कॉट बेसेंट ने दी कड़ी चेतावनी

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अपने संदेश में ईरान के साथ वित्तीय संबंध रखने वाले बैंकों और संस्थानों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई करेगा। उनका कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान से जुड़े वित्तीय तंत्र पर दबाव बनाए रखेंगे और प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करने वाली संस्थाओं को भी निशाने पर लिया जाएगा।

आर्थिक दबाव की रणनीति पर उठ रहे सवाल

हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और संस्थानों को पूरी तरह अलग-थलग करने की अमेरिकी रणनीति अभी पूरी तरह सफल नहीं हुई है। चीन और भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ सीधे कड़े कदम उठाने के बजाय अमेरिकी प्रशासन कई मामलों में चेतावनी और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाता दिखाई देता है। इससे ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति की सीमाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

वैश्विक बाजार और तेल कीमतों की चुनौती

अमेरिका के लिए ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार की स्थिरता बनाए रखना भी चुनौती है। बड़े देशों के खिलाफ अचानक कठोर प्रतिबंधों से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्था में अस्थिरता पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी अमेरिकी प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है। खासकर आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले महंगे तेल का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और मतदाताओं पर पड़ सकता है।

ईरान के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहने के संकेत

तुर्की के बैंक पर अमेरिकी प्रतिबंधों से स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन ईरान की कमाई और वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अमेरिका आने वाले दिनों में किन अन्य वित्तीय संस्थानों और कारोबारी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि चीन, भारत, तुर्की और अन्य देशों की प्रतिक्रिया इस अमेरिकी अभियान को किस दिशा में प्रभावित करती है।

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Chandan Das

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