US waiver on Iranian oil
US waiver on Iranian oil: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार से भारत के लिए एक अत्यंत सकारात्मक खबर आई है। अमेरिकी प्रशासन ने अपने कड़े रुख में अचानक बदलाव करते हुए ईरानी कच्चे तेल के आयात पर अस्थायी छूट (Waiver) देने का निर्णय लिया है। इस अप्रत्याशित फैसले ने भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए सस्ते ईंधन के द्वार फिर से खोल दिए हैं, जिससे घरेलू स्तर पर तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकी विदेश विभाग और स्कॉट बेसेंट द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, वाशिंगटन ने ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान की है। यह निर्णय विशेष रूप से उन तेल खेपों के लिए है जो 20 मार्च 2026 तक जहाजों पर लोड की जा चुकी हैं और जिनकी डिलीवरी 19 अप्रैल तक सुनिश्चित की जानी है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो 2018 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन वर्तमान ऊर्जा संकट और गहराते तनाव को देखते हुए इस ‘यू-टर्न’ को वैश्विक अर्थव्यवस्था को संतुलित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के तीन प्रमुख रिफाइनिंग सूत्रों ने पुष्टि की है कि वे ईरानी तेल की खरीद फिर से शुरू करने की योजना पर काम कर रहे हैं। हालांकि, कंपनियां वर्तमान में भारत सरकार के आधिकारिक दिशा-निर्देशों और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच सुरक्षित भुगतान तंत्र (Payment Mechanism) पर स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं। भारत, जिसके पास अन्य प्रमुख एशियाई देशों की तुलना में कम रणनीतिक तेल भंडार है, ने हाल ही में रूसी तेल की बुकिंग में भी तेजी दिखाई थी। अब ईरान का विकल्प खुलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को अतिरिक्त बल मिलेगा।
ईरानी तेल पर मिली इस छूट ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया के ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। हॉर्मुज जलसंधि में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, जिससे क्षेत्र की कई रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से कम पर काम कर रही हैं। एशियाई देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से पूरा करते हैं। ऐसे में ईरानी तेल की उपलब्धता से ईंधन निर्यात में आ रही गिरावट को थामने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 170 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में जहाजों पर खड़ा है। यह विशाल भंडार संकट के समय में एक बफर के रूप में कार्य कर सकता है। गौरतलब है कि 2018 के प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। पिछले वर्ष चीन के स्वतंत्र रिफाइनरों ने प्रतिदिन लगभग 13.8 लाख बैरल तेल का आयात किया। चूंकि ईरानी तेल प्रतिबंधों के कारण रियायती दरों पर उपलब्ध रहता है, इसलिए भारत के लिए भी यह आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
सस्ते तेल के लाभ के बावजूद, व्यापारिक मार्ग अभी भी चुनौतियों से भरा है। सबसे बड़ी समस्या बैंकिंग प्रणाली और भुगतान व्यवस्था को लेकर है। इसके अलावा, नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) के साथ सीधे अनुबंधों के अभाव में अब अधिकांश व्यापार तीसरे पक्ष के डीलरों के माध्यम से हो रहा है। पुराने जहाजों का उपयोग और बीमा (Insurance) से जुड़ी अनिश्चितताएं भी कंपनियों के लिए चिंता का विषय हैं। जानकारों का मानना है कि नियमों को समझने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन भारतीय कंपनियां इस अवसर को भुनाने के लिए तेजी से कदम बढ़ाएंगी।
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