Bear Attack :
Bear Attack : उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के थौलधार क्षेत्र में पिछले लंबे समय से सक्रिय एक आदमखोर भालू ने गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को भारी कोहराम मचा दिया। सुल्याधार क्षेत्र में घात लगाए बैठे इस वन्यजीव ने गश्त पर निकली वन विभाग की टीम और स्थानीय ग्रामीणों पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में एक वन दरोगा (फॉरेस्टर) और ग्राम प्रधान सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना ने पूरे जिले में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय निवासियों के भीतर व्याप्त डर अब भारी आक्रोश में बदल गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन दरोगा अजयपाल पंवार, बेरगणी के ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत और ग्रामीण विनोद रावत भालू की लोकेशन ट्रैक करने के लिए जंगल की ओर गए थे। तभी झाड़ियों में छिपे भालू ने उन पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तीनों व्यक्तियों ने हिम्मत नहीं हारी और निहत्थे होने के बावजूद काफी देर तक भालू का मुकाबला किया। हालांकि, संघर्ष के दौरान भालू ने विनोद रावत के चेहरे को अपने नाखूनों से बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया। किसी तरह भालू को भगाने के बाद लहूलुहान हालत में घायलों को ग्रामीण अपने कंधों पर लादकर मुख्य सड़क तक लाए।
घटना के बाद जब ग्रामीणों ने प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) पुनीत तोमर को सूचित किया, तो आरोप है कि उन्होंने मदद भेजने के बजाय भालू के हमले के ‘साक्ष्य’ मांग लिए। इस असंवेदनशील रवैये से नाराज ग्रामीण घायलों को लेकर सीधे टिहरी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। वहां प्रदर्शनकारियों ने डीएफओ को तुरंत हटाने की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फुला दिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. श्याम विजय ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही घायलों का प्राथमिक उपचार शुरू करवाया।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि वन विभाग ने गश्ती दल को मौत के मुंह में ढकेल दिया है। उन्होंने कहा कि जब विभाग को पता था कि भालू हिंसक हो चुका है और पहले भी एक महिला को घायल कर चुका है, तो गश्ती दल को केवल लाठी-डंडों के साथ क्यों भेजा गया? ग्रामीणों का तर्क था कि यदि वन दरोगा के पास आत्मरक्षार्थ बंदूक या ट्रanquilizer गन (बेहोश करने वाली बंदूक) होती, तो आज तीन लोग अस्पताल में नहीं होते। संसाधनों की इस कमी ने वन विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है।
भारी जन दबाव और बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा। टिहरी की मुख्य विकास अधिकारी (CDO) वरुणा अग्रवाल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। उन्होंने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि उच्च स्तर से इस आदमखोर भालू को ‘शूट’ (मारने) करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। डीएफओ पुनीत तोमर ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों से अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित क्षेत्र में जल्द ही पेशेवर शूटरों की तैनाती कर दी जाएगी।
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। प्रतापनगर के कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नेगी ने देहरादून में प्रमुख वन संरक्षक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर भालू को मारा नहीं गया या पकड़ा नहीं गया, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेंगे। विधायक ने मांग की कि घायलों को उचित मुआवजा दिया जाए और क्षेत्र में वन विभाग की गश्त को आधुनिक हथियारों के साथ सुदृढ़ किया जाए।
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