★ सकालो में अलग-अलग आयु के 50 शुकरों में किया जा रहा है परीक्षण
★ राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल में तैयार हुई वैक्सीन
अंबिकापुर @thetarget365 शुकरों (सुअर) में होने वाली गंभीर संक्रामक बीमारी “पोसिंन रोप्रोडक्टिव एंड रेस्पिरेटरी सिंड्रोम” (पीआर आरएस) से बचाव के लिए वैक्सीन तैयार की गई है। इसका पहला ट्रायल सरगुजा जिले के शासकीय शुकर पालन केंद्र सकालो के अलग-अलग आयु के 50 शुकरों में किया जा रहा है। इस बीमारी को ब्लू इयर के नाम से भी जाना जाता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल में वैक्सीन तैयार किया गया है। संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डा. राजू कुमार व डा. फतह सिंह द्वारा वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है। वैक्सीन लगने के बाद शुकरों पर इसके प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। अभी तक शुकरों में स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं आई है। 21 दिन बाद शुकरों को बूस्टर डोज लगाया जाएगा। देश में तेजी से फैल रही बीमारी शुकरों की इस बीमारी को सबसे पहले 1987 में अमेरिका में देखा गया था। उसके बाद 1991 में नीदरलैंड में वायरस की पहचान हुई। यूरोपीय और अमेरिकी देशों के बाद यह बीमारी अब भारत में भी पहुंच चुकी है। यह बीमारी शुकर पालकों को बड़ा आर्थिक चोट पहुंचाती है। इसी कारण भारत देश में इसका वैक्सीन तैयार किया गया है।
बीमारी के लक्षण
अत्यधिक तेज बुखार, भूख में कमी, आंखों से पानी बहना सांस लेने में दिक्कत, गर्भपात, नाक से साव
वैक्सीन लगने के बाद शुकरों के स्वास्थ्य का किया जा रहा है अध्ययन
राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल में विकसित वैक्सीन का पहला फील्ड ट्रायल सरगुजा में चल रहा है। संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी शूकरों में वैक्सीन लगा रहे है। वैक्सीन लगने के बाद शुकरों के स्वास्थ्य का अध्ययन किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर पशुपालन विभाग फील्ड ट्रायल में सहयोग प्रदान कर रहा है।
डा. सीके मिश्रा
प्रभारी,
शासकीय शुकर पालन केंद्र
सकालो सरगुजा