VB-G RAM G Act 2025
VB-G RAM G Act 2025: भारत के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ‘विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट’ यानी VB-G RAM G 2025 का पुरजोर समर्थन किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि यह नया कानून केवल ग्रामीणों को दिहाड़ी मजदूरी देने का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह गांवों के कायाकल्प और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक मिशन है। यह कानून अब ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (MGNREGA) का स्थान लेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून की खूबियों पर चर्चा करते हुए कहा कि VB-G RAM G के माध्यम से गांवों में न केवल काम मिलेगा, बल्कि स्थायी संपत्तियों (Permanent Assets) का निर्माण भी होगा। उन्होंने जोर दिया कि इस योजना से खेती-किसानी को नई ताकत मिलेगी। जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कों और भंडारण केंद्रों जैसी संपत्तियां बनने से लंबे समय में ग्रामीण इलाकों की उत्पादकता में भारी इजाफा होगा। पीएम मोदी का मानना है कि इससे गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन में कमी आएगी और ग्रामीण भारत की क्रय शक्ति बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, इस कानून को अंतिम रूप देने से पहले एक लंबी और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई। केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही, आर्थिक विशेषज्ञों के साथ तकनीकी बैठकें की गईं और विभिन्न हितधारकों के सुझावों को शामिल किया गया। इस विस्तृत प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नया कानून पुराने ढांचे की कमियों को दूर करे और भ्रष्टाचार मुक्त होकर सीधे लाभार्थी तक पहुँचे।
VB-G RAM G बिल का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के भारी हंगामे और विरोध के बावजूद यह बिल 18 दिसंबर को सदन से पास हुआ था। इसके बाद, 21 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे अपनी संवैधानिक मंजूरी दी, जिसके साथ ही इसने कानून का रूप ले लिया। विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात को लेकर था कि यह मनरेगा के मूल स्वरूप को कमजोर कर सकता है, लेकिन सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना का बचाव करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जानबूझकर ग्रामीणों के बीच भ्रम फैला रहे हैं। चौहान ने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस में बैठे लोगों को न तो खेत की समझ है और न ही गांव की। उन्हें यह भी नहीं पता कि आलू जमीन के नीचे उगता है या ऊपर।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने रोजगार कम नहीं किया है, बल्कि इस योजना के लिए वार्षिक बजट को बढ़ाकर 1.51 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।
नया कानून ‘आजीविका मिशन’ पर केंद्रित है। इसमें केवल शारीरिक श्रम ही नहीं, बल्कि कौशल विकास (Skill Development) को भी जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण मजदूर केवल गड्ढे खोदने तक सीमित न रहें, बल्कि वे ऐसे कार्यों में संलग्न हों जो गांव के बुनियादी ढांचे को मजबूत करें। 1.51 लाख करोड़ के भारी-भरकम बजट के साथ, यह कानून 2025 के ग्रामीण भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
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