Venezuela crisis 2026
Venezuela crisis 2026: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने वैश्विक राजनीति में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। रूस के बाद अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी महाशक्ति चीन ने इस घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका से निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को तत्काल बिना शर्त रिहा करने की मांग की है। चीन ने स्पष्ट किया है कि किसी संप्रभु राष्ट्र के निर्वाचित प्रमुख को इस तरह बलपूर्वक हिरासत में लेना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह विश्व शांति के लिए एक बड़ा खतरा भी है।
चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में अमेरिका की इस कार्रवाई को ‘वर्चस्ववादी कृत्य’ करार दिया गया है। बीजिंग का तर्क है कि अमेरिका द्वारा मादुरो को जबरन हिरासत में लेना और उन्हें देश से बाहर ले जाना अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है। चीन ने जोर देकर कहा कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर के उन उद्देश्यों और सिद्धांतों को पूरी तरह से नकारता है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की बात करते हैं। चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह अपनी सैन्य शक्ति का दुरुपयोग बंद करे।
बीजिंग ने वाशिंगटन से आह्वान किया है कि वह वेनेजुएला की सरकार को अस्थिर करने के प्रयासों को तुरंत रोके। चीन ने मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि अमेरिका को मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए। चीन का मानना है कि सैन्य बल का खुलेआम इस्तेमाल लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई क्षेत्रों की सुरक्षा को लंबे समय के लिए खतरे में डाल सकता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वे इस घटनाक्रम से “बेहद स्तब्ध” हैं और इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
वेनेजुएला में इस सैन्य अभियान के बाद न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अमेरिका के भीतर भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कार्रवाई को जोखिम भरा बताया है। जानकारों का कहना है कि यदि बीच का कोई रास्ता नहीं निकाला गया या इस सैन्य अभियान का उचित अंतरराष्ट्रीय औचित्य साबित नहीं किया गया, तो राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम अमेरिका की वैश्विक साख को नुकसान पहुँचा सकता है और यह घरेलू राजनीति में भी उन पर भारी पड़ सकता है।
निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी चीन के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक झटका माना जा रहा है। दरअसल, मादुरो के पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज के समय से ही वेनेजुएला और चीन के बीच बेहद घनिष्ठ रणनीतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। चीन ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया है। मादुरो सरकार का पतन बीजिंग के लैटिन अमेरिका में बढ़ते प्रभाव को रोकने वाला कदम है। यही कारण है कि चीन इस मामले में अब खुलकर अमेरिका के सामने खड़ा हो गया है और इस क्षेत्रीय संकट को वैश्विक मंच पर उठाने की तैयारी कर रहा है।
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