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अंबिकापुर @thetarget365 सरगुजा जिला मुख्यालय में महिला द्वारा बच्चों की बेरहमी से पिटाई का वीडियो शनिवार को तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने महिला के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीकृत किया है। महिला के अंबिकापुर के मठपारा का होने की बात कही जा रही है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
शनिवार की दोपहर सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग वीडियो तेजी से वायरल हुए। एक वीडियो में महिला प्लास्टिक की पाइप से एक बच्ची को बेरहमी से पिटाई करते नजर आ रही थी। बच्ची दर्द से कर रही थी। छोड़ने की गुहार लगा रही थी लेकिन महिला को तरस नहीं आई। एक अन्य वीडियो में एक किशोर को वही महिला पिटाई करते नजर आ रही थी। लगभग चार मिनट के दो अलग-अलग वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने इसे संज्ञान में लिया। वीडियो अंबिकापुर शहर का ही था। महिला अंबिकापुर शहर के मठपारा की बताई गई। इसे देखते हुए पुलिस ने महिला के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया है।
पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस तक जो शिकायत मिली है उसके मुताबिक महिला द्वारा बच्चों के माध्यम से गांजा और शराब की बिक्री कराई जाती है। इस तथ्य की जांच कराई जा रही है। पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने बताया कि महिला के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 146 तथा किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 व 77 के तहत अपराध पंजीकृत कर लिया गया है। बारीकी से प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं। महिला का नाम प्रतिमा सिंह है जो मठपारा, मणिपुर अंबिकापुर की निवासी है। जांच में आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।
भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने वायरल वीडियो के आधार पर महिला के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि महिला जिस तरीक़े से बच्ची की पिटाई कर रही है वह बेहद निंदनीय और अमानवीय कृत्य है महिला के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
महिला पर बीएनएस की धारा 146 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए अवैध रूप से मजबूर करने के अपराध को संबोधित करती है। यह धारा ऐसे कृत्यों के लिए दंड को परिभाषित करती है, जिसमें एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं।
महिला पर किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत भी अपराध दर्ज किया गया है। यह अधिनियम बच्चों के प्रोटेक्शन के लिए बना है। इस अधिनियम के तहत, बच्चों के साथ होने वाली हिंसा या ज्यादती के मामले में जुर्माने के साथ-साथ गंभीर मामलों में उम्रकैद की सज़ा का भी प्रावधान है। इस अधिनियम के तहत, बच्चों के लिए बाल मैत्री प्रक्रिया के ज़रिए उनकी देखरेख, संरक्षण, पुनर्वास, उपचार, और विकास सुनिश्चित किया जाता है।इसी तरह, अगर कोई व्यक्ति किसी किशोर को किसी खतरनाक काम में लगाता है, तो उसे भी तीन साल तक की जेल हो सकती है और जुर्माना भी लग सकता है।
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