Russia Ukraine war
Russia Ukraine war: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से जारी भीषण रक्तपात के बीच अब यूरोपीय देशों के भीतर भी अंतर्कलह तेज हो गई है। हाल ही में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की के बीच सीधा टकराव देखने को मिला। ओर्बन ने बेहद सख्त लहजे में जेलेंस्की को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्होंने अब सारी हदें पार कर दी हैं। यह विवाद तब गहराया जब जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से हंगरी की नीतियों और ओर्बन के व्यक्तिगत नेतृत्व पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम ने यूरोपीय संघ के भीतर यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता पर पहले से चल रही बहस को और अधिक हवा दे दी है।
विवाद की मुख्य जड़ स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित ‘विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum) की बैठक बनी। यहाँ जेलेंस्की ने अपने संबोधन में यूरोपीय देशों द्वारा दी जा रही सैन्य और आर्थिक मदद पर गहरी निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि यूरोप का संकल्प अपर्याप्त है और हथियार पर्याप्त मात्रा में नहीं भेजे जा रहे। इस पर पलटवार करते हुए विक्टर ओर्बन ने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर लिखा कि जेलेंस्की का व्यवहार अस्वीकार्य है। ओर्बन ने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे हंगरी में चुनाव नजदीक आ रहे हैं, जेलेंस्की जानबूझकर उन्हें और उनकी सरकार को व्यक्तिगत रूप से निशाना बना रहे हैं ताकि राजनीतिक दबाव बनाया जा सके।
ओर्बन ने अपने पोस्ट में यूरोपीय आयोग (European Commission) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि जेलेंस्की की शिकायतों के तुरंत बाद यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूक्रेन के लिए एक नया ‘रोडमैप’ पेश कर दिया। इस योजना के तहत ब्रसेल्स ने यूक्रेन की लगभग सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है, जिसमें 2027 तक 800 अरब डॉलर की विशाल सहायता राशि, यूरोपीय संघ में त्वरित प्रवेश और साल 2040 तक निरंतर समर्थन शामिल है। ओर्बन ने इसे बिना सोचे-समझे लिया गया फैसला बताया और कहा कि यह यूरोपीय नागरिकों के हितों के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने स्पष्ट किया कि हंगरी अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार एक ‘राष्ट्रीय याचिका’ दायर करने जा रही है। इस याचिका के माध्यम से हंगरी की जनता और सरकार ब्रसेल्स को यह कड़ा संदेश देगी कि वे यूक्रेन की इस अंतहीन फंडिंग के लिए भुगतान नहीं करेंगे। ओर्बन का तर्क है कि जब यूक्रेन की युद्ध रणनीति पूरी तरह से विफल साबित हो रही है, तब ब्रसेल्स द्वारा आँख बंद करके अरबों डॉलर खर्च करना समझदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि हंगरी अपने संसाधनों का उपयोग अपने नागरिकों के कल्याण के लिए करेगा, न कि किसी दूसरे देश के विवाद में।
जेलेंस्की और ओर्बन के बीच का यह टकराव यूरोपीय संघ (EU) की आंतरिक एकता पर सवालिया निशान खड़ा करता है। जहाँ एक तरफ पोलैंड और बाल्टिक देश यूक्रेन को अधिकतम मदद देने के पक्षधर हैं, वहीं हंगरी जैसे देश अब इस वित्तीय बोझ से हाथ खींचना चाहते हैं। जेलेंस्की की ‘अपर्याप्त मदद’ वाली टिप्पणी ने उन नेताओं को नाराज कर दिया है जो पहले से ही अपने देशों में बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ओर्बन की यह याचिका ब्रसेल्स के निर्णयों को प्रभावित कर पाती है या फिर यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता बेरोकटोक जारी रहेगी।
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