Vinod Mehra
Vinod Mehra: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ सितारे ऐसे रहे हैं जिन्होंने बहुत कम समय में अपनी चमक बिखेरी और हमेशा के लिए अमर हो गए। विनोद मेहरा एक ऐसा ही नाम हैं। महज 45 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले इस अभिनेता ने अपने छोटे से जीवनकाल में 183 से अधिक फिल्मों में काम किया। आज उनकी जयंती है। 13 फरवरी 1945 को अमृतसर में जन्मे विनोद मेहरा ने उस दौर में अपनी पहचान बनाई जब बॉलीवुड ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन दुनिया में कदम रख रहा था। अपनी मासूम मुस्कान और संजीदा अभिनय से उन्होंने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई।
विनोद मेहरा का जन्म भले ही पंजाब के अमृतसर में हुआ था, लेकिन उनकी परवरिश और शिक्षा मुंबई में हुई। सेंट जेवियर्स से पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान अभिनय की ओर होने लगा था। उन्होंने बचपन में ही कैमरे का सामना करना शुरू कर दिया था और कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार अपनी प्रतिभा दिखाई। यहीं से उनकी दोस्ती लाइट, कैमरा और एक्शन की दुनिया से हो गई। बड़े होने पर उन्होंने प्रसिद्ध ‘यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट’ में हिस्सा लिया। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रतियोगिता में उन्होंने दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना को कड़ी टक्कर दी थी।
विनोद मेहरा ने मुख्य अभिनेता के तौर पर अपने करियर की शुरुआत साल 1971 में फिल्म ‘एक थी रीता’ से की थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘अनुराग’, ‘घर’, ‘नागिन’ और ‘बेमिसाल’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। वे न केवल एक बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि एक कुशल निर्देशक भी रहे। उनकी सादगी और किरदारों को जीने की कला ने उन्हें उस दौर के सुपरस्टार्स के बीच भी अलग पहचान दिलाई। आज भी नए कलाकार उनके अभिनय से प्रेरणा लेते हैं।
विनोद मेहरा अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपनी निजी जिंदगी और ‘फीमेल फैन फॉलोइंग’ को लेकर भी खूब चर्चा में रहे। उनका नाम उस दौर की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री रेखा के साथ गहराई से जुड़ा। फिल्म ‘घर’ की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। मीडिया में उनकी गुपचुप शादी की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। कहा जाता है कि विनोद मेहरा रेखा को अपने घर भी ले गए थे, लेकिन उनके परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। हालांकि, रेखा ने बाद में सिमी ग्रेवाल के शो में शादी की खबरों को महज अफवाह बताया था, लेकिन विनोद के लिए उनका लगाव किसी से छिपा नहीं था।
विनोद मेहरा केवल परदे के सामने ही नहीं, बल्कि परदे के पीछे भी अपनी कहानी कहना चाहते थे। उन्होंने फिल्म ‘गुरुदेव’ के साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। दुर्भाग्य से, इस फिल्म के पूरा होने से पहले ही 30 अक्टूबर 1990 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। महज 45 साल की आयु में उनका जाना बॉलीवुड के लिए एक बड़ा सदमा था। बाद में इस फिल्म को राज सिप्पी ने पूरा किया और रिलीज किया।
विनोद मेहरा की विरासत उनकी उन 183 फिल्मों में सुरक्षित है, जो आज भी टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर चाव से देखी जाती हैं। उनके गाए या उन पर फिल्माए गए गाने आज भी लोगों की जुबां पर रहते हैं। आज उनकी जयंती के अवसर पर, पूरा देश उस अभिनेता को याद कर रहा है जिसने रिश्तों की जटिलता और प्यार की मासूमियत को परदे पर बखूबी उतारा।
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