Walking Benefits: वॉक और एक्सरसाइज को आमतौर पर फिटनेस, वजन नियंत्रण और मजबूत शरीर से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, शारीरिक गतिविधि का असर हमारी मानसिक सेहत और दिमागी कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है। बोर्ड-सर्टिफाइड हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में एक्सरसाइज के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित फायदों के बारे में जानकारी दी। उनके मुताबिक, नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव कम करने, मूड बेहतर करने और दिमाग को स्वस्थ रखने में मददगार आदतों में शामिल हो सकती है।


मानसिक सेहत को बेहतर रखने में मददगार है शारीरिक गतिविधि
डॉ. लंदन के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान या तनावग्रस्त महसूस करता है, तब शारीरिक गतिविधि उसे बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकती है। कई बार जब व्यक्ति का व्यायाम या टहलने का बिल्कुल मन नहीं करता, उसी समय शरीर को थोड़ी सक्रियता की जरूरत हो सकती है। उनका कहना है कि कार्डियो एक्सरसाइज का फायदा केवल हृदय तक सीमित नहीं रहता और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग सिर्फ मांसपेशियों के लिए उपयोगी नहीं है। शरीर के लिए अच्छी गतिविधियां दिमाग के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकती हैं।

सिर्फ 20 मिनट की वॉक से तनाव में मिल सकती है राहत
डॉ. लंदन ने बताया कि कुछ समय तक रोजाना करीब 20 मिनट पैदल चलने की आदत तनाव को संभालने में मदद कर सकती है। नियमित वॉक से शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। इससे व्यक्ति लगातार एक ही बात के बारे में सोचते रहने यानी ओवरथिंकिंग से बाहर निकलने की कोशिश कर सकता है। शारीरिक गतिविधि नकारात्मक विचारों के लगातार चलने वाले चक्र को तोड़ने में भी मदद कर सकती है।
सुबह की धूप और वॉक का मूड पर असर
सुबह या दिन के शुरुआती हिस्से में बाहर निकलकर टहलना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त रूप से फायदेमंद हो सकता है। प्राकृतिक रोशनी शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम को व्यवस्थित रखने में भूमिका निभाती है। इससे नींद के पैटर्न और मूड को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। इसलिए रोजाना कुछ समय खुले वातावरण में पैदल चलना शरीर और दिमाग दोनों के लिए उपयोगी दिनचर्या बन सकता है।
लंबे समय में डिप्रेशन और एंग्जायटी का जोखिम घट सकता है
डॉ. लंदन के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधि लंबे समय में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, रोजाना करीब 20 मिनट पैदल चलने से डिप्रेशन के जोखिम में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी देखी जा सकती है, जबकि 10 मिनट की वॉक से भी करीब 18 प्रतिशत तक कमी का दावा किया गया है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को व्यक्तिगत उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

दिमागी कोशिकाओं के लिए भी उपयोगी हो सकती है एक्सरसाइज
नियमित व्यायाम का संबंध दिमाग में ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) से भी बताया जाता है। यह ऐसा प्रोटीन है जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संपर्क और उनके विकास में भूमिका निभाता है। आसान भाषा में समझें तो नियमित एक्सरसाइज दिमाग के लिए ऐसी परिस्थितियां बनाने में मदद कर सकती है, जो उसकी कार्यक्षमता और स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक हों।
उम्र बढ़ने के साथ भी फायदेमंद हो सकती है सक्रिय जीवनशैली
नियमित शारीरिक गतिविधि को लंबे समय तक बनाए रखना उम्र बढ़ने के दौरान भी महत्वपूर्ण हो सकता है। डॉक्टर लंदन ने वॉक और एक्सरसाइज को अल्जाइमर तथा पार्किंसंस जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के जोखिम से जोड़ते हुए इसके संभावित लाभों का उल्लेख किया। हालांकि, किसी बीमारी की रोकथाम या इलाज के लिए केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है।
रोजाना छोटी शुरुआत बन सकती है बड़ी आदत
अगर किसी व्यक्ति के पास लंबे वर्कआउट के लिए समय नहीं है, तो वह छोटी अवधि की वॉक से शुरुआत कर सकता है। नियमितता यहां सबसे महत्वपूर्ण है। रोजाना कुछ मिनट पैदल चलना धीरे-धीरे सक्रिय जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है। किसी भी नई एक्सरसाइज को अपनी उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार शुरू करना बेहतर है। मानसिक या शारीरिक परेशानी लगातार बनी रहे तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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