Watercock Bird : बारिश की पहली फुहारें न केवल धरती की प्यास बुझाती हैं, बल्कि समूचे पारिस्थितिकी तंत्र में एक नई ऊर्जा का संचार करती हैं। छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और घने जंगलों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, इन दिनों एक खास मेहमान की गूंज से सराबोर है। यह आवाज उस दुर्लभ पक्षी ‘वाटरकॉक’ (Gallicrex cinerea) की है, जिसे स्थानीय लोग बेहद प्यार से ‘कपकपिया’ के नाम से बुलाते हैं। जैसे ही आसमान में बादल घिरते हैं और पहली बारिश होती है, इस पक्षी की अनोखी आवाज सुनाई देने लगती है। यह न केवल बस्तर के किसानों के लिए सुखद अहसास है, बल्कि पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए भी पूरे साल का सबसे प्रतीक्षित समय होता है।

धान के खेतों का रहस्यमयी और दुर्लभ निवासी
वाटरकॉक पक्षी अपनी छिपने की कला में माहिर होता है। यह अक्सर घने धान के खेतों, दलदली इलाकों (वेटलैंड्स) और लंबी घास के बीच अपना बसेरा बनाता है। इसे देख पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता, क्योंकि यह बहुत शर्मीला और सतर्क प्रकृति का पक्षी है। इसकी मौजूदगी का पता मुख्य रूप से इसकी विशिष्ट आवाज से ही चलता है। मानसून के आगमन के साथ ही यह अपनी प्रजनन अवधि में प्रवेश करता है, जिसके दौरान नर वाटरकॉक अपनी आवाज से क्षेत्र का निर्धारण करते हैं। यह पक्षी मानसून का एक जीवंत संदेशवाहक माना जाता है। जब तक मानसून का मौसम बना रहता है, तब तक इनकी सक्रियता अपने चरम पर होती है, जो यह संकेत देती है कि प्रकृति अपनी पूरी जीवंतता और जैव-विविधता के साथ वापस लौट आई है।

पर्यावरण संतुलन और किसानों का मित्र पक्षी
वैज्ञानिक दृष्टि से ‘गैलिक्रेक्स सिनेरिया’ के नाम से पहचाने जाने वाला यह वाटरकॉक, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में एक अहम कड़ी है। धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह पक्षी किसी मित्र से कम नहीं है। यह खेतों में पनपने वाले हानिकारक कीटों, छोटे घोंघों और खरपतवार के बीजों का सेवन करता है, जिससे फसल की सुरक्षा में मदद मिलती है। इसके अलावा, वाटरकॉक की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि बस्तर के जल स्रोत और आर्द्रभूमि अभी भी सुरक्षित और स्वस्थ हैं। दलदली इलाकों का बना रहना न केवल इस पक्षी के लिए, बल्कि क्षेत्र के भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए खास अवसर
बस्तर के धान के खेतों में वाटरकॉक का दिखना फोटोग्राफरों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। इसकी अनूठी शारीरिक बनावट, जिसमें नर पक्षी की गर्दन पर एक खास तरह का उभार (cump) होता है, उसे अन्य जल पक्षियों से अलग बनाता है। मानसून के दौरान जब खेत हरे-भरे होते हैं, तो वाटरकॉक को कैमरे में कैद करना एक कला है। फोटोग्राफर घंटों तक घास के बीच छिपकर इसकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं। मानसून के इन कुछ हफ्तों में बस्तर का वातावरण एक अलग ही रौनक से भर जाता है, जहां हर तरफ प्रकृति का उत्सव दिखाई देता है। वाटरकॉक का स्वागत करना वास्तव में मानसून के आने का स्वागत करना है, जो बस्तर के लोगों और पर्यावरण के अटूट रिश्ते को दर्शाता है।
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