छत्तीसगढ़

CRPF Camp Protest: ‘जान दे देंगे पर जमीन नहीं’- दंतेवाड़ा में CRPF कैंप के खिलाफ ग्रामीणों का बड़ा ऐलान

CRPF Camp Protest: नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए जहां एक ओर राज्य सरकार और केंद्र की एजेंसियां नए CRPF कैंप स्थापित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन कैंपों का स्थानीय स्तर पर विरोध भी तेज होता जा रहा है। दंतेवाड़ा जिले के रेंगानार गांव में प्रस्तावित CRPF 111 बटालियन हेडक्वार्टर के खिलाफ सैकड़ों ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और साफ कहा — “जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे।”

ग्रामीणों की नाराजगी उफान पर

प्रशासन ने रेंगानार गांव में लगभग 29 हेक्टेयर भूमि की पहचान की है, जहां CRPF 111 बटालियन का हेडक्वार्टर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। यह भूमि खसरा नंबर 158 से 163 के बीच आती है। इनमें से तीन खसरे (160, 161, 163) निजी स्वामित्व वाली जमीनें हैं, जबकि बाकी हिस्सों पर ग्रामीण खेती-किसानी और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यह जमीन उनके जीवन, आजीविका और आस्था से जुड़ी है।

गांव में हुई बड़ी बैठक, तीन पंचायतों के लोग जुटे

मसेनार, रेंगानार और गढ़मिरी पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर बैठक की और निर्णय लिया कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे वर्षों से इसी भूमि पर खेती करते आ रहे हैं और यहीं उनके देवी-देवताओं के स्थल हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन जबरन कब्जा करने की कोशिश करता है, तो वे आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो अपनी जान की बाजी भी लगाएंगे।

प्रशासन के तर्क और ग्रामीणों की चिंता

प्रशासन का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की तेजी से तैनाती जरूरी है, ताकि इलाके में स्थायी शांति और विकास स्थापित हो सके। वहीं, ग्रामीणों का तर्क है कि जब नक्सलवाद अब धीरे-धीरे खत्म होने की ओर है, तो गांव के बीच स्थायी सैन्य कैंप बनाने का औचित्य नहीं है। ग्रामीणों का डर है कि कैंप बन जाने से उनकी खेती की जमीन छिन जाएगी, सामाजिक माहौल बिगड़ेगा और आवागमन पर पाबंदियां लग सकती हैं।

नक्सल ऑपरेशन और बदलता परिदृश्य

बीते कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के दक्षिणी जिलों में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई हुई है। बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसी के चलते अब सरकार नए कैंप स्थापित कर नक्सलमुक्त क्षेत्र को स्थायी बनाने की दिशा में काम कर रही है।रेंगानार के ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी सहमति के बिना जमीन का अधिग्रहण करता है, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल, प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है।

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