Weather Alert
Weather Alert: भारत में गर्मी के आधिकारिक सीजन (अप्रैल से जून) की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार को आगामी महीनों के लिए अपना विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है। इस रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मार्च की तरह अप्रैल में भी देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है। हालांकि, इस बारिश के बावजूद तापमान में गिरावट की संभावना बेहद कम है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों की आवाजाही और नमी के कारण उमस बढ़ेगी और ‘हीटवेव’ यानी लू वाले दिनों की संख्या भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।
बीता मार्च का महीना मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कुल 33.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो साल 2001 के बाद 10वीं बार सबसे अधिक वर्षा वाला रिकॉर्ड है। हालांकि, इस बेमौसम बारिश ने जान-माल का नुकसान भी किया; बिजली गिरने से 32 लोगों की मौत हुई, जबकि तूफान, बर्फबारी और बाढ़ के कारण भी कई जानें गईं। तापमान की दृष्टि से देखें तो मार्च में न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया है। यह संकेत देता है कि रातें अब पहले के मुकाबले अधिक गर्म होने लगी हैं।
आगामी तीन महीनों के लिए मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों के साथ-साथ मध्य भारत के पूर्वी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा। शेष भारत में यह सामान्य या उससे थोड़ा नीचे रह सकता है। वहीं, न्यूनतम तापमान यानी रात के समय की गर्मी लगभग पूरे देश में (महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों को छोड़कर) सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस बार गर्मियों में रात के समय भी राहत मिलना मुश्किल होगा, जिससे एयर कंडीशनर और बिजली की खपत में भारी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
अप्रैल के महीने में ही भीषण लू (Heatwave) चलने की प्रबल संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, तटीय ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हीटवेव वाले दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहने वाली है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी लू के थपेड़े लोगों को परेशान करेंगे। विशेष रूप से तटीय राज्यों में उच्च आर्द्रता (Humidity) और अधिक तापमान का मेल स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
अप्रैल के महीने में देशभर में औसत वर्षा सामान्य से 112% अधिक रहने की संभावना है। पूरे देश में लगभग 39.2 मिमी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। पूर्वोत्तर भारत को यदि छोड़ दें, तो देश के लगभग हर कोने में सामान्य या उससे अधिक वर्षा होगी। आमतौर पर अप्रैल में होने वाली यह बारिश पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण होती है, जो धूल भरी आंधी और गरज के साथ आती है। हालांकि, यह वर्षा केवल क्षणिक राहत प्रदान करेगी और जैसे ही आसमान साफ होगा, सूर्य की तपिश और अधिक तीखी महसूस होगी।
31 मार्च 2026 को जारी इस मौसम रिपोर्ट से साफ है कि यह गर्मी का सीजन ‘अप्रत्याशित’ रहने वाला है। एक ओर अधिक बारिश जल संचयन के लिए अच्छी हो सकती है, वहीं दूसरी ओर हीटवेव और बिजली गिरने की घटनाएं चिंता का विषय हैं। किसानों के लिए भी बेमौसम बारिश फसलों की कटाई और भंडारण में चुनौतियां पैदा कर सकती है। आम जनता को सलाह दी गई है कि वे लू से बचने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतें और मौसम के पल-पल बदलते मिजाज के प्रति सतर्क रहें।
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