West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान किसी भी पात्र वोटर का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। कोलकाता में चुनाव तैयारियों की दो दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है। आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर योग्य नागरिक को मताधिकार मिले और कोई भी अयोग्य व्यक्ति इस सूची में शामिल न हो सके।
पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास को देखते हुए आयोग का इस बार मुख्य लक्ष्य मतदाताओं को हिंसा और डर के माहौल से मुक्त करना है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के कानून का पालन कराएं। बंगाल की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए उन्होंने एक नया नारा भी दिया— “चुनाओ पर्वो, पश्चिमबंगेर गर्वो” (अर्थात् चुनाव का पर्व, पश्चिम बंगाल का गर्व है)। उन्होंने कहा कि यहाँ के मतदाता संविधान का सम्मान करते हैं और हमेशा भारी संख्या में मतदान कर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
अपनी कोलकाता यात्रा के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त को लगातार तीसरे दिन कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। मंगलवार सुबह जब वे दक्षिणेश्वर काली मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे, तो वहां मौजूद भीड़ ने उन्हें काले झंडे दिखाए और ‘गो बैक’ के नारे लगाए। इससे पहले एयरपोर्ट और कालीघाट मंदिर के बाहर भी उनके खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, इस विरोध के बावजूद सीईसी ने अपने तय कार्यक्रमों को जारी रखा। उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मिलकर मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, डीजीपी पीयूष पांडे और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा इंतजामों का गहन आकलन किया।
राजनीतिक मोर्चे पर ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विपक्षी दल, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर्स के नाम काटे जाने की आशंका जताते हुए इस प्रस्ताव की बात कही थी। यदि यह प्रस्ताव संसद में पेश होता है, तो भारतीय इतिहास में यह किसी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ लाया गया अपनी तरह का पहला प्रस्ताव होगा। कांग्रेस सहित अन्य दल भी इस नोटिस का समर्थन करने की योजना बना रहे हैं।
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है, जो सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसके लिए किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में प्रस्ताव लाया जा सकता है।
हस्ताक्षर की आवश्यकता: लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस अनिवार्य है।
जांच समिति: नोटिस मिलने के बाद एक समिति आरोपों (कदाचार या अयोग्यता) की जांच करती है।
विशेष बहुमत: प्रस्ताव को पारित करने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि वे बंगाल में ‘त्योहार’ की तरह चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। क्या आप चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए नए सुरक्षा दिशा-निर्देशों या मतदाता सूची में नाम चेक करने की प्रक्रिया के बारे में और जानकारी चाहते हैं?
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