West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उत्तर 24 परगना जिले में एक बड़ा झटका लगा है। बदुरिया विधानसभा सीट से निवर्तमान विधायक अब्दुर रहीम काजी ने रविवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित सभी पदों से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया। टीएमसी द्वारा आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी किए जाने के बाद से ही रहीम के तेवर कड़े नजर आ रहे थे। मौजूदा विधायक होने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने इस बार उन पर भरोसा नहीं जताया और उनका टिकट काट दिया। इसी फैसले से आहत होकर काजी ने अपनी राजनीतिक राहें अलग करने का निर्णय लिया है।
अब्दुर रहीम काजी ने अपने इस्तीफे की घोषणा के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक का सहारा लिया। उन्होंने एक विस्तृत और भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का फैसला उनके लिए अत्यंत कठिन था, लेकिन यह पूरी तरह सिद्धांतों पर आधारित है। काजी ने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में पार्टी के घोषित आदर्शों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई पैदा हो गई है, जिसके साथ तालमेल बिठाना अब उनके आत्मसम्मान के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक जन-प्रतिनिधि के रूप में वे अब ऐसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं रह सकते जहाँ नैतिकता से समझौता करना पड़े।
अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए अब्दुर रहीम काजी ने टीएमसी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वे लंबे समय से पार्टी के भीतर व्याप्त विभिन्न ‘अन्यायों और अनुचित प्रथाओं’ के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। रहीम के अनुसार, उन्होंने कई बार संगठनात्मक खामियों और भ्रष्टाचार के मुद्दों को वरिष्ठ नेताओं के सामने रखा, लेकिन हर बार उनके सुझावों और शिकायतों को अनसुना कर दिया गया। नेतृत्व की इस निरंतर उपेक्षा और सुधारात्मक कदमों के अभाव ने उन्हें इस कदर निराश किया कि अंततः उन्हें पार्टी को अलविदा कहना पड़ा।
पश्चिम बंगाल में चुनाव तारीखों के ऐलान के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की लहर तेज हो गई है। बदुरिया तो महज एक उदाहरण है; राज्य के कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी टिकट न मिलने से नाराज नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि निवर्तमान विधायकों का इस तरह पार्टी छोड़ना ममता बनर्जी के लिए चुनावी समीकरण बिगाड़ सकता है। बदुरिया जैसी महत्वपूर्ण सीट पर विधायक का इस्तीफा न केवल सांगठनिक कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि विपक्षी दलों को भी बढ़त बनाने का मौका देता है।
इस्तीफे के बाद अब्दुर रहीम काजी के अगले कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे भाजपा, कांग्रेस या किसी अन्य दल में शामिल होंगे, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों को एक बड़ा संदेश दिया है। काजी ने कहा कि उनकी असली ताकत आम जनता का प्यार और आशीर्वाद है। उन्होंने वादा किया कि वे पद पर रहें या न रहें, बदुरिया की जनता के हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वे निर्दलीय या किसी अन्य विकल्प के साथ चुनावी मैदान में उतर सकते हैं, जिससे बदुरिया में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।
2026 का बंगाल चुनाव अब व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और पार्टी के प्रति वफादारी की परीक्षा बनता जा रहा है। अब्दुर रहीम काजी का जाना टीएमसी के लिए उत्तर 24 परगना में एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ के विश्वसनीय चेहरों का इस तरह बगावत करना यह दर्शाता है कि टिकट वितरण में इस बार एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को कम करने की कोशिशें पार्टी के भीतर ही आंतरिक कलह को जन्म दे रही हैं। अब देखना होगा कि टीएमसी इस डैमेज कंट्रोल को कैसे संभालती है और रहीम का अगला राजनीतिक पड़ाव क्या होता है।
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