West Bengal Election
West Bengal Election: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। सभी राजनीतिक दल सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। इस बीच, चुनाव से पहले होने वाला ‘मतदाता सूची संशोधन’ (SIR) विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है। भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ताजा घटनाक्रम ईस्ट बर्दवान का है, जहाँ मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और शांतिपूर्ण सुनवाई रणक्षेत्र में बदल गई।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार (17 जनवरी) को ईस्ट बर्दवान में जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय के बाहर माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब मतदाता सूची संशोधन की सुनवाई चल रही थी। विवाद की मुख्य जड़ ‘फॉर्म नंबर 7’ (जो आमतौर पर नाम हटाने या आपत्ति दर्ज करने के लिए होता है) को जमा करने को लेकर हुई। देखते ही देखते टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से की गई नारेबाजी ने आग में घी डालने का काम किया, जिससे प्रशासनिक कार्य में भारी बाधा उत्पन्न हुई और कार्यालय परिसर के बाहर अफरा-तफरी मच गई।
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की भारी टुकड़ी मौके पर पहुँची। पुलिस ने शुरुआत में स्थिति को बातचीत से सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी शांत होने के बजाय और उग्र हो गए। इसी बीच बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और हाथापाई में बदल गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और इस दौरान पुलिस ने बीजेपी के चार सक्रिय कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
बीजेपी नेतृत्व ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि बर्दवान नॉर्थ सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट राजर्षि नाथ जानबूझकर ‘फॉर्म नंबर 7’ स्वीकार नहीं कर रहे थे। बीजेपी का दावा है कि उनके कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध कर रहे थे। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। टीएमसी नेताओं का कहना है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सुनवाई प्रक्रिया को बाधित करने और इलाके में अशांति फैलाने के उद्देश्य से हंगामा किया, जिसे टीएमसी कार्यकर्ताओं ने सूझबूझ से रोकने की कोशिश की।
हालात को बेकाबू होते देख प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर से दोनों पार्टियों के समर्थकों को खदेड़ दिया गया है। भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में त्वरित कार्य बल (RAF) की तैनाती कर दी गई है। हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे परिसर की कड़ी निगरानी कर रही हैं। यह घटना स्पष्ट करती है कि बंगाल चुनाव 2026 की राह में मतदाता सूची और प्रशासनिक पारदर्शिता एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाली है।
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