West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों के आधिकारिक ऐलान के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग (ECI) ने आदर्श आचार संहिता लागू होते ही अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य प्रशासन में बहुत बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। चुनाव की घोषणा के चंद घंटों के भीतर की गई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आयोग का यह कदम स्पष्ट संकेत है कि वह बंगाल में बिना किसी प्रशासनिक हस्तक्षेप के पारदर्शी चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
नंदिनी चक्रवर्ती के स्थान पर चुनाव आयोग ने 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वहीं, गृह सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संगमित्रा घोष को सौंपी गई है। संगमित्रा अब गृह और पहाड़ी मामलों के प्रधान सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगी। निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन नियुक्तियों को तुरंत अमल में लाया जाए। साथ ही, आयोग ने 16 मार्च (सोमवार) को दोपहर 3 बजे तक इन अधिकारियों के कार्यभार संभालने की रिपोर्ट भी तलब की है।
प्रशासनिक शीर्ष स्तर पर बदलाव के साथ-साथ चुनाव आयोग ने जमीनी स्तर पर भी सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में लापरवाही या पक्षपात की आशंका के चलते सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (AERO) को सीधे तौर पर निलंबित कर दिया है। आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है, उन्हें पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक चुनाव से जुड़े किसी भी कार्य या पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है जिनमें अधिकारियों पर सत्ता पक्ष के प्रभाव में काम करने के आरोप लगे थे।
निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई और चुनाव की तारीखों के ऐलान पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि इस बार चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगे। ममता बनर्जी सरकार पर कटाक्ष करते हुए घोष ने कहा, “TMC को अपने जिन अधिकारियों पर भरोसा नहीं होता, वे उन्हें बदल देते हैं, लेकिन हमारी लड़ाई केवल अधिकारियों को बदलने की नहीं है, हम तो पश्चिम बंगाल की पूरी सरकार को ही बदलने के लिए मैदान में हैं।” उन्होंने लंबी चुनाव प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से चुनाव लंबा चलता है, जिससे संसाधनों और कर्मचारियों पर दबाव बढ़ता है।
पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास अक्सर हिंसा और तनाव से भरा रहा है, जिसे देखते हुए निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। दिलीप घोष के अनुसार, यदि सुरक्षा की गारंटी मिले तो चुनाव प्रक्रिया को छोटा किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। नए मुख्य सचिव और गृह सचिव के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना और केंद्रीय बलों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आएंगी, यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नए प्रशासनिक प्रमुख राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराने में कितने सफल होते हैं।
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