WB Election 2026
WB Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही निर्वाचन आयोग (ECI) पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के उद्देश्य से आयोग ने पुलिस प्रशासन में एक और बड़ा फेरबदल किया है। ताजा आदेश के तहत, बंगाल के पांच महत्वपूर्ण पुलिस रेंजों के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद प्रशासनिक मशीनरी पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आयोग लगातार कड़े कदम उठा रहा है, जिससे राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार, रायगंज रेंज के डीआईजी संतोष निंबालकर को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह 2009 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी राठौर अमित कुमार भरत को नियुक्त किया गया है। अमित कुमार इससे पहले ट्रैफिक और रोड सेफ्टी विभाग में डीआईजी के पद पर तैनात थे। इसी क्रम में, रणनीतिक रूप से संवेदनशील मुर्शिदाबाद रेंज में भी बदलाव किया गया है। यहाँ लंबे समय से तैनात सुधीर कुमार नीलकंठम का तबादला कर दिया गया है और अब 2011 बैच के आईपीएस अजीत सिंह यादव इस रेंज की जिम्मेदारी संभालेंगे। अजीत सिंह इससे पहले एसपी डीईओ (DEO) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
कोलकाता के निकटवर्ती प्रेसिडेंसी रेंज में भी आयोग ने बदलाव की मुहर लगाई है। यहाँ भास्कर मुखोपाध्याय की जगह 2007 बैच के अनुभवी आईपीएस अधिकारी कंकर प्रसाद बरुई को नया डीआईजी बनाया गया है। वहीं, उत्तर बंगाल के महत्वपूर्ण जलपाईगुड़ी रेंज में भोलानाथ पांडे को हटाकर 2009 बैच की महिला आईपीएस अधिकारी अंजलि सिंह की नियुक्ति की गई है। अंजलि सिंह अब तक ट्रैफिक विभाग में डीआईजी के पद पर कार्यरत थीं। चुनाव के दौरान उत्तर बंगाल की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
औद्योगिक और कृषि प्रधान बर्धमान रेंज में भी नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। यहाँ तैनात डीआईजी आलोक राजोरिया का स्थानांतरण कर दिया गया है। उनके स्थान पर 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी श्रीहरि पांडे को बर्धमान रेंज का नया डीआईजी नियुक्त किया गया है। श्रीहरि पांडे इससे पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), नॉर्थ बंगाल में डीआईजी के रूप में कार्य कर रहे थे। खुफिया विभाग में काम करने का उनका लंबा अनुभव चुनाव के दौरान बर्धमान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने में कारगर साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि यह फेरबदल केवल डीआईजी स्तर तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के शेड्यूल की घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही राज्य के शीर्ष नौकरशाहों को हटाकर कड़ा संदेश दिया था। पिछले रविवार को मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद 16 मार्च को एक और बड़े आदेश में पश्चिम बंगाल के डीजीपी पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार पर भी गाज गिरी। आयोग का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रभाव या प्रशासनिक ढिलाई को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस महानिदेशक (DGP) से लेकर रेंज स्तर के अधिकारियों के तबादले यह सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि चुनावी मशीनरी पूरी तरह निष्पक्ष रहे। इन नियुक्तियों के माध्यम से आयोग ने उन अधिकारियों को मौका दिया है जो अब तक फील्ड पोस्टिंग से दूर थे या तकनीकी विभागों में तैनात थे। अब देखना यह होगा कि नई नियुक्तियों के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था में क्या बदलाव आता है और विपक्षी दल इन फैसलों को किस तरह देखते हैं।
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