West Bengal Election 2026
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी बिसात बिछ चुकी है और मुकाबला अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुँच गया है। राज्य विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में सोमवार, 30 मार्च को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कद्दावर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उनके साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे, जो बंगाल में बीजेपी की मजबूती और केंद्रीय नेतृत्व के समर्थन का साफ संकेत है। शुभेंदु का नामांकन दाखिल करना इस चुनाव की सबसे बड़ी सियासी हलचल मानी जा रही है।
शुभेंदु अधिकारी ने इस बार एक बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए राज्य की दो सबसे हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों—भवानीपुर और नंदीग्राम—से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। भवानीपुर सीट को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता है। यहाँ से चुनाव लड़कर शुभेंदु ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को उनके गढ़ में चुनौती दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुकाबला 2026 के चुनाव का सबसे बड़ा ‘टाइटैनिक क्लैश’ साबित होने वाला है। भवानीपुर की जनता के बीच शुभेंदु का उतरना टीएमसी के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
जहाँ भवानीपुर में शुभेंदु चुनौती दे रहे हैं, वहीं नंदीग्राम उनके लिए अपना ‘होम ग्राउंड’ है। साल 2021 के पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम की सीट पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी, जब शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद कड़े मुकाबले में 1,956 मतों के अंतर से पराजित किया था। हालांकि, अपनी हार के बाद मुख्यमंत्री बने रहने के लिए ममता बनर्जी ने भवानीपुर सीट से उपचुनाव लड़ा था और वहाँ से बड़ी जीत हासिल की थी। अब एक बार फिर नंदीग्राम की जनता के पास यह मौका है कि वे अपने क्षेत्र के नेता और राज्य की मुख्यमंत्री के बीच के इस महासंग्राम में अपना फैसला सुनाएं।
पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव आयोग ने दो चरणों में मतदान कराने का निर्णय लिया है।
पहला चरण: 23 अप्रैल 2026
दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026
मतगणना (रिजल्ट): 4 मई 2026
चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) प्रभावी हो गई है। राज्य के करीब 6.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता इस बार सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी, इसका फैसला करेंगे। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने राज्य भर में 80,719 से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए हैं।
इस बार का चुनाव मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उभरती हुई शक्ति भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। ममता बनर्जी जहाँ अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और ‘बंगाली अस्मिता’ के दम पर तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही हैं, वहीं बीजेपी ‘सोनार बांग्ला’ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे के साथ मैदान में है। शुभेंदु अधिकारी का दो सीटों से चुनाव लड़ना बीजेपी की उस आक्रामक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे टीएमसी के बड़े नेताओं को उनके अपने ही क्षेत्रों में घेरने की योजना बना रहे हैं।
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