West Bengal Election
West Bengal Election: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शनिवार, 17 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरे को लेकर मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला करते हुए उन्हें ‘पॉलिटिकल टूरिस्ट’ (राजनीतिक पर्यटक) करार दिया। पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री केवल चुनावों के समय राज्य का दौरा करते हैं और जमीनी हकीकत से उनका कोई सरोकार नहीं है। टीएमसी ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री का बंगाल आना केवल राजनीतिक लाभ के लिए है और वे राज्य की प्रगति में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया। एक बेहद कड़े पोस्ट में टीएमसी ने लिखा कि पीएम मोदी ने बंगाल में जनसांख्यिकीय असंतुलन और दंगों को लेकर एक मनगढ़ंत कहानी गढ़ी है। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा, “भारतीय राजनीति में सबसे बड़े दंगा भड़काने वालों को बंगाल को सांप्रदायिक सद्भाव पर भाषण देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।” टीएमसी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा के नेता बंगाल की शांतिपूर्ण छवि को खराब करने की सुनियोजित साजिश रच रहे हैं।
टीएमसी ने भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका पूरा “राजनीतिक धंधा” केवल सांप्रदायिक जहर घोलने, नफरत फैलाने और ध्रुवीकरण करने पर टिका हुआ है। पार्टी ने हाल ही में मुर्शिदाबाद में हुई अशांति का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा वहां फूट डालने वाले एजेंटों को भेज रही है ताकि दंगे भड़काए जा सकें। टीएमसी ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी सरकार की भयानक नाकामियों को छिपाने के लिए बंगाल के बारे में झूठ बोलना बंद करें और राज्य की जनता को गुमराह करना छोड़ दें।
प्रधानमंत्री द्वारा घुसपैठ के मुद्दे को उठाए जाने पर टीएमसी ने पलटवार करते हुए कई सवाल दागे। पार्टी ने पूछा कि अगर अवैध घुसपैठ वाकई उतना बड़ा संकट है जितना केंद्र सरकार दावा करती है, तो फिर गृह मंत्री अमित शाह के अधीन काम करने वाली सीमा सुरक्षा बल (BSF) बॉर्डर सुरक्षित करने में विफल क्यों रही है? टीएमसी ने सवाल किया कि चुनाव आयोग ने उन विदेशियों की सूची जारी करने से क्यों इनकार कर दिया जिन्हें पकड़ने का दावा सरकार करती है? पार्टी के अनुसार, सीमा की सुरक्षा पूरी तरह से केंद्र की जिम्मेदारी है और अपनी विफलता का ठीकरा वे राज्य सरकार पर नहीं फोड़ सकते।
टीएमसी ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी प्रधानमंत्री को घेरा। पार्टी ने पूछा कि पहलगाम जैसे भारी सैन्य सुरक्षा वाले इलाके में आतंकवादी नागरिकों का नरसंहार करने में कैसे सफल रहे? इसके अलावा, देश की राजधानी दिल्ली में हुए हालिया धमाके, जिसमें 15 लोगों की जान गई, उसे लेकर भी सवाल पूछे गए। टीएमसी ने कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकार के तहत काम करने वाले हरियाणा और दिल्ली में अगर आतंकी मॉड्यूल सक्रिय हैं, तो यह केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी नाकामी है।
प्रधानमंत्री के इस दौरे और उस पर टीएमसी की तीखी प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्मा चुका है। एक तरफ भाजपा बंगाल में कानून-व्यवस्था और घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बना रही है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी की पार्टी केंद्र की सुरक्षा विफलताओं और सांप्रदायिक राजनीति को ढाल बनाकर पलटवार कर रही है। आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और भी तेज होने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल 2026 के राजनीतिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं।
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