WB Election 2026
WB Election 2026 : पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का महापर्व संपन्न हो चुका है। राज्य में दो चरणों में हुए मतदान ने इस बार इतिहास रच दिया है। भारी उत्साह और रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के बीच अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। एग्जिट पोल्स के रुझानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, जिससे गठबंधन की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 इस बार अपनी भारी वोटिंग प्रतिशत के लिए याद किया जाएगा। आजादी के बाद से अब तक के सभी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए, दूसरे और अंतिम चरण में 92.67% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक रही, जो राज्य में एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का संकेत दे सकती है।
चुनाव संपन्न होते ही गठबंधन के समीकरणों पर सवाल उठने लगे हैं। जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से यह पूछा गया कि क्या त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की स्थिति में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का समर्थन करेगी, तो उन्होंने काफी नपा-तुला जवाब दिया। खरगे ने भविष्य के पत्तों को छिपाते हुए कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में है और सही तस्वीर साफ होने के लिए दो दिन का इंतजार करना बेहतर होगा।
विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल्स ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। MATERIZE समेत लगभग सभी प्रमुख एग्जिट पोल्स में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को पूर्ण बहुमत या सबसे बड़े दल के रूप में उभरते हुए दिखाया गया है। इन रुझानों के अनुसार, बंगाल में इस बार सत्ता परिवर्तन की लहर चल रही है और ममता दीदी की सत्ता से विदाई की संभावना प्रबल दिख रही है।
मैटेराइज (MATERIZE) के आंकड़ों पर गौर करें तो पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 146 से 161 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी टीएमसी को भारी नुकसान होता दिख रहा है और वह 125 से 140 सीटों के बीच सिमट सकती है। अन्य क्षेत्रीय दलों और निर्दलीयों के खाते में 6 से 10 सीटें जाने की उम्मीद है। यदि नतीजे इन अनुमानों के करीब रहते हैं, तो बीजेपी पहली बार बंगाल की सत्ता पर काबिज हो सकती है।
यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत (148 सीटें) नहीं मिलता है, तो बंगाल में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति पैदा होगी। ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस और वामदलों की भूमिका निर्णायक हो जाएगी। हालांकि खरगे के बयान से साफ है कि कांग्रेस ने अभी अपने विकल्प खुले रखे हैं। क्या कांग्रेस वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर बीजेपी को रोकने के लिए टीएमसी के साथ जाएगी, या फिर बंगाल की राजनीति एक नया मोड़ लेगी? इसका अंतिम फैसला 4 मई को मतगणना के बाद ही होगा।
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