West Bengal Election
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर हुए मतदान को पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया है। आयोग ने इस क्षेत्र की चुनावी प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद सभी 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान (Re-polling) के आदेश दिए हैं। यह फैसला लोकतंत्र की शुचिता बनाए रखने के लिए लिया गया है, जिससे अब राज्य की चुनावी जंग एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, फलता विधानसभा क्षेत्र में अब 21 मई 2026 को फिर से वोट डाले जाएंगे। मतदान की प्रक्रिया सुबह 7 बजे शुरू होगी और शाम 6 बजे तक चलेगी। दोबारा होने वाले इस मतदान के नतीजे भी अलग से घोषित किए जाएंगे, जिसके लिए 24 मई 2026 की तारीख तय की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे ताकि पहले हुई घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
फलता विधानसभा सीट पर मुख्य रूप से चतुष्कोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से जहांगीर खान मैदान में हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिबांगशु पांडा पर भरोसा जताया है। वहीं, संयुक्त मोर्चा की ओर से कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला और सीपीआई (एम) के संभु नाथ भी कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इन चार प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दोबारा मतदान की घोषणा के बाद सभी प्रत्याशियों ने एक बार फिर जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए कमर कस ली है।
चुनाव रद्द करने के पीछे का सबसे प्रमुख कारण 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान सामने आई ‘गंभीर चुनावी अनियमितताएं’ हैं। बीजेपी उम्मीदवार दिबांगशु पांडा ने आरोप लगाया था कि देबीपुर (बूथ संख्या 177) सहित कई केंद्रों पर ईवीएम मशीनों (EVMs) के साथ छेड़छाड़ की गई थी। शिकायत के अनुसार, बीजेपी के चुनाव चिह्न वाले बटन को सफेद टेप से ढक दिया गया था, जिससे मतदाता अपनी पसंद की पार्टी को वोट नहीं दे पा रहे थे। इसके अलावा कई मतदान केंद्रों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिशें भी की गईं, जिन्हें आयोग ने संज्ञान में लिया है।
स्थानीय स्तर पर स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब फलता के निवासियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है। लोगों ने शिकायत की है कि उन्हें स्वतंत्र रूप से मतदान करने से रोकने के लिए धमकियां दी गईं। शनिवार को इन विरोध प्रदर्शनों की खबरें सुर्खियों में रहीं, जिससे चुनाव आयोग पर सख्त कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया था।
फलता से पहले पश्चिम बंगाल के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी चुनाव आयोग ने दोबारा मतदान कराया है। शनिवार को ही डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के 15 चुनिंदा मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। गौरतलब है कि बंगाल की इन सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग हुई थी। राज्य की शेष सीटों के लिए मतगणना 4 मई को होनी है, लेकिन फलता का फैसला 24 मई को आने के कारण अंतिम नतीजों की तस्वीर कुछ समय बाद स्पष्ट होगी।
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