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Malda Judicial Gherao: NIA का बड़ा एक्शन, 12 मामले दर्ज कर शुरू की कड़क जांच, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख।

Malda Judicial Gherao:  पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनावी ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी और उनके घेराव के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने इस गंभीर घटना की जांच के लिए बुधवार को औपचारिक रूप से 12 मामले दर्ज किए हैं। एनआईए की यह कार्रवाई देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट के सीधे निर्देश के बाद हुई है। अदालत ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के साथ हुए खिलवाड़ को बेहद गंभीरता से लिया है, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।

क्या है पूरा मामला: मतदाता सूची संशोधन के दौरान हुआ हंगामा

यह घटना उस समय की है जब पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन संशोधन’ (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य चल रहा था। इस महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से संपन्न कराने के लिए न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था। आरोप है कि कार्य के दौरान भीड़ द्वारा इन अधिकारियों का घेराव किया गया और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। इस घटना ने न केवल चुनाव आयोग की तैयारियों पर सवाल खड़े किए, बल्कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी थी।

NIA का आधिकारिक बयान: पुलिस की एफआईआर को किया गया री-रजिस्टर

देर रात जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में, एनआईए ने स्पष्ट किया कि उसने 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का अक्षरशः पालन किया है। एजेंसी ने मालदा जिले के दो प्रमुख पुलिस थानों—मोथाबाड़ी और कालियाचक में पहले से दर्ज प्राथमिकियों (FIR) को अपने हाथ में ले लिया है। एनआईए ने मोथाबाड़ी पुलिस स्टेशन की 7 और कालियाचक पुलिस स्टेशन की 5 पुरानी एफआईआर को फिर से दर्ज (Re-register) किया है। एजेंसी अब इन मामलों की नए सिरे से गहन जांच करेगी ताकि साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश किया जा सके।

न्यायिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल

एनआईए की जांच का मुख्य केंद्र “न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और संबंधित कानून-व्यवस्था की घटनाएं” हैं। लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए न्यायपालिका के सदस्यों का निडर होकर काम करना आवश्यक है। मालदा में जिस तरह से अधिकारियों को घेरकर उनके काम में बाधा पहुँचाई गई, उसे सीधे तौर पर संवैधानिक मशीनरी को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है। एनआईए अब यह पता लगाएगी कि क्या यह कोई सोची-समझी साजिश थी या फिर अचानक भड़की भीड़ का हिस्सा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल: केंद्रीय एजेंसी की एंट्री से बढ़ी तपिश

पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान अक्सर हिंसा और तनाव की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इस बार न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाए जाने से मामला संवेदनशील हो गया है। एनआईए द्वारा 12 एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में भी सरगर्मी बढ़ गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी की एंट्री को स्थानीय प्रशासन की विफलता के रूप में भी देखा जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एनआईए अपनी जांच में किन बड़े नामों या समूहों का खुलासा करती है।

निष्पक्ष चुनाव और सुरक्षा की चुनौती

मतदाता सूचियों का संशोधन किसी भी चुनाव की बुनियाद होता है। यदि इस प्रक्रिया में लगे अधिकारियों को ही सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजमी है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और एनआईए की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि न्यायिक अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में मालदा के उन क्षेत्रों में सुरक्षा और कड़ी की जा सकती है, जहाँ कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है।

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