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West Bengal Politics: अमर्त्य सेन और शमी को नोटिस पर सियासत तेज, ममता के आरोपों पर शुभेंदु अधिकारी का पलटवार

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के दौरान एक नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा डेटा में ‘लॉजिकल गड़बड़ियों’ को सुधारने की प्रक्रिया के तहत राज्य की कई बड़ी हस्तियों को सुनवाई के लिए नोटिस भेजे गए हैं। इस फेहरिस्त में नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, मशहूर कवि जय गोस्वामी, भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और टॉलीवुड सुपरस्टार व सांसद दीपक अधिकारी (देव) जैसे नाम शामिल हैं। आयोग की इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जहाँ सत्तापक्ष इसे अपमान बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे नियम सम्मत प्रक्रिया करार दे रहा है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर तीखा हमला

दिग्गजों को मिले नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। शनिवार को भेजे गए इस पत्र में ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का यह कदम जाने-माने नागरिकों को ‘बेवजह परेशान’ करने जैसा है। उन्होंने कहा कि अमर्त्य सेन जैसे सम्मानित व्यक्तित्वों को इस तरह की जांच के दायरे में लाना उनकी गरिमा के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग बताते हुए साफ किया कि उनकी सरकार और पार्टी इस भेदभावपूर्ण कार्रवाई का कड़ा विरोध करती है।

शुभेंदु अधिकारी का पलटवार: ‘अमर्त्य सेन को छूट क्यों मिलनी चाहिए?’

ममता बनर्जी के पत्र के जवाब में पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को अपना जवाबी पत्र भेजा। शुभेंदु ने मुख्यमंत्री के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए सवाल उठाया कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति विशेष क्यों होना चाहिए? उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “अगर वोटर लिस्ट में तकनीकी या लॉजिकल त्रुटियां हैं, तो उनकी जांच करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है। इसमें किसी खास व्यक्ति को केवल इसलिए छूट नहीं दी जा सकती क्योंकि वह समाज में बड़ा नाम है।”

कानून और भेदभाव रहित प्रक्रिया पर शुभेंदु का तर्क

शुभेंदु अधिकारी ने अपने तीन पन्नों के विस्तृत पत्र में चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि आयोग का यह एक्शन पूरी तरह से पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के है। शुभेंदु के अनुसार, जब सामान्य नागरिकों को अपनी पहचान और पते की पुष्टि के लिए नोटिस मिल सकते हैं, तो हस्तियों को इससे बाहर रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस भेजा जाना किसी को अपराधी साबित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की एक कानूनी प्रक्रिया मात्र है।

ममता बनर्जी पर ‘राजनीतिक अहंकार’ और स्वार्थ का आरोप

शुभेंदु ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़े प्रहार करते हुए उनके विरोध को ‘घमंडी’ और ‘राजनीति से प्रेरित’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी इस मामले को केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए तूल दे रही हैं। शुभेंदु के मुताबिक, मुख्यमंत्री चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्था के काम में बाधा डालकर जनता को गुमराह कर रही हैं। उन्होंने पत्र में यह भी जोड़ा कि निर्वाचन आयोग का प्राथमिक मकसद हर नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना है और इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप अनुचित है।

चुनाव आयोग के फैसले पर सबकी नजरें

दिग्गजों को भेजे गए इन नोटिसों और उस पर बढ़ते सियासी ड्रामे के बीच अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। जहां ममता बनर्जी इसे ‘प्रताड़ना’ बताकर आयोग को पीछे हटने के लिए कह रही हैं, वहीं भाजपा का नेतृत्व इस प्रक्रिया को और सख्ती से लागू करने की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोग अमर्त्य सेन और मोहम्मद शमी जैसे नामों के लिए प्रक्रिया में कोई बदलाव करता है या सभी के लिए एक समान नियम लागू रहते हैं। फिलहाल, बंगाल की राजनीति में ‘वोटर लिस्ट’ का यह मुद्दा सबसे गरम चर्चा का विषय बना हुआ है।

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