West Bengal SIR:
West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को दो पन्नों का एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य में चल रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) पर गंभीर आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव सुधार और वोटर लिस्ट के शुद्धिकरण के नाम पर आम नागरिकों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस पूरी प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं से परे बताया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि SIR की इस कठोर और बिना तैयारी वाली प्रक्रिया के कारण अब तक राज्य में 77 लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, उन्होंने 4 लोगों द्वारा आत्महत्या के प्रयास और 17 लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने का सीधा संबंध पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पैदा हुए तनाव और डर से जोड़ा है। ममता के अनुसार, आम जनता में अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने को लेकर भारी दबाव है, जिसके कारण लोग सदमे में हैं।
ममता बनर्जी ने इस बात पर भी नाराजगी व्यक्त की कि पुनरीक्षण के नाम पर देश के प्रतिष्ठित नागरिकों और बुजुर्गों का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन जैसे वरिष्ठ नागरिकों से भी उनकी पहचान साबित करने के लिए दस्तावेज मांगे गए। इसके अलावा, प्रसिद्ध कवि जॉय गोस्वामी, सांसद व अभिनेता दीपक अधिकारी (देव) और भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी जैसी मशहूर हस्तियों को भी इस जटिल प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री का तर्क है कि जब देश की जानी-मानी हस्तियों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम जनता की स्थिति और भी बदतर होगी।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की ड्राफ्ट लिस्ट आने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में पहले 7.66 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के बाद ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। यानी कुल 58.20 लाख वोटर्स के नाम हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 7.6 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 24.17 लाख लोग मृत पाए गए, 1.38 लाख फर्जी या डुप्लीकेट नाम थे, जबकि 32.65 लाख वोटर्स शिफ्ट या लापता होने की श्रेणी में डाले गए हैं।
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के सामने पुनरीक्षण प्रक्रिया की छह बड़ी कमियां रखी हैं:
महिलाओं का अपमान: शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं को बार-बार बुलाकर परेशान किया जा रहा है।
अकुशल पर्यवेक्षक: कई जगहों पर बिना ट्रेनिंग वाले कर्मचारी तैनात हैं, जो लोगों को ‘देशद्रोही’ तक कह रहे हैं।
पुलिस का दुरुपयोग: पुलिस का इस्तेमाल जनता की सुरक्षा के बजाय पर्यवेक्षकों को बचाने के लिए किया जा रहा है।
राजनीतिक पक्षपात: चुनिंदा इलाकों को ही सुधार के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है।
पोर्टल में विसंगति: बंगाल के लिए इस्तेमाल हो रहा पोर्टल अन्य राज्यों से अलग और नियमों के विपरीत है।
मामूली गलतियों पर सख्ती: नाम की स्पेलिंग या उम्र में छोटे अंतर पर भी लोगों को परेशान किया जा रहा है।
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