West Bengal SIR
West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण के तहत जारी की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस ताजा सूची के अनुसार, पूरे राज्य में लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिसके बाद सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ा रुख अपनाया है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। आयोग का तर्क है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए की गई है। हटाए गए नामों में वे लोग शामिल हैं जो या तो मृत हो चुके हैं, या फिर स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो गए हैं। इसके अलावा, अनुपस्थित रहने वाले और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं के नाम भी इस सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
सबसे चौंकाने वाले आंकड़े मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से सामने आए हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के मुताबिक, भवानीपुर में करीब 44,787 मतदाताओं के नाम गायब हैं। जनवरी 2025 तक इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,06,295 मतदाता थे, जो अब घटकर मात्र 1,61,509 रह गए हैं। यानी अकेले भवानीपुर में ही लगभग 21.7 प्रतिशत वोटरों के नाम काट दिए गए हैं। इसे लेकर टीएमसी ने गहरी नाराजगी जताई है और इसे एक सुनियोजित कदम करार दिया है।
मतदाता सूची में हुई इस भारी कटौती के बाद तृणमूल कांग्रेस ने खुद मोर्च संभाला लिया है। पार्टी नेतृत्व ने निर्णय लिया है कि वे चुनाव आयोग के आंकड़ों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करेंगे। टीएमसी के बूथ लेवल एजेंट (BLO) अब घर-घर जाकर उन नामों की भौतिक जांच (Physical Verification) करेंगे जिन्हें सूची से हटाया गया है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी वैध मतदाता का लोकतांत्रिक अधिकार न छीना जाए। टीएमसी ने स्पष्ट किया है कि वे इस डेटा की बारीकी से दोबारा जांच करेंगे।
पार्टी ने अपने स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे उन लोगों के साथ मजबूती से खड़े रहें जिनके नाम सूची से गायब हैं। टीएमसी की ओर से “मे आई हेल्प यू” (May I Help You) नाम से विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों के माध्यम से लोगों को दस्तावेज जमा करने, नए फॉर्म भरने और सुनवाई (Hearing) की प्रक्रिया में तकनीकी और कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी। पार्टी वॉलंटियर्स को विशेष रूप से उन इलाकों में भेजा जा रहा है जहाँ नाम कटने की संख्या सबसे अधिक है।
भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र कोलकाता नगर निगम के कई वार्डों को मिलाकर बना है। टीएमसी के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, वार्ड नंबर 70, 72 और 77 में मतदाताओं के नाम सबसे ज्यादा कटे हैं। विशेष रूप से वार्ड 77, जो अल्पसंख्यक बहुल इलाका माना जाता है, वहां पर पार्टी ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। टीएमसी का मानना है कि इन वार्डों में बड़े पैमाने पर नामों का कटना चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए यहाँ ‘क्लेम और ऑब्जेक्शन’ (दावा और आपत्ति) की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जा रहा है।
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