Bengal Election Violence
Bengal Election Violence : पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित जनसभा से ठीक पहले रविवार की रात हिंसा की आग में जल उठी। जगद्दल और भाटपारा इलाकों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इस दौरान न केवल पत्थरबाजी हुई, बल्कि खुलेआम बम फेंके गए और फायरिंग भी की गई। इस हिंसक झड़प ने चुनावी माहौल में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिंसा की मुख्य वजह प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के स्वागत में लगाए गए भाजपा के झंडों और पोस्टरों को फाड़ना बताया जा रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टीएमसी के लोगों ने जानबूझकर उनके प्रचार सामग्री को नुकसान पहुँचाया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के समर्थक जगद्दल पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए। शुरुआत में तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते पत्थरबाजी और बमबारी में तब्दील हो गई। पुलिस के सामने ही उपद्रवियों ने कानून की धज्जियां उड़ाईं, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कड़ा संघर्ष करना पड़ा।
हिंसा का स्तर इतना खतरनाक था कि भाटपारा से भाजपा विधायक और उम्मीदवार पवन सिंह के आवास को भी निशाना बनाया गया। उपद्रवियों ने उनके घर पर बम फेंके, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। इस हमले में घर की संपत्ति को नुकसान पहुँचा और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पवन सिंह ने दावा किया कि उन पर यह हमला तब हुआ जब वे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराकर लौट रहे थे। उनके अनुसार, इस दौरान हुई फायरिंग में सुरक्षा में तैनात एक सीआईएसएफ (CISF) जवान के पैर में भी गोली लगी है।
भाजपा उम्मीदवार पवन सिंह ने टीएमसी के स्थानीय पार्षद पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक दिन पहले हुई नुक्कड़ सभा में बाधा डाली थी। वहीं, टीएमसी उम्मीदवार अमित गुप्ता ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। गुप्ता का कहना है कि हिंसा की शुरुआत भाजपा समर्थकों ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब टीएमसी कार्यकर्ता शांतिपूर्वक अपनी पार्टी के झंडे लगा रहे थे, तब उन पर हमला किया गया और पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। अमित गुप्ता ने यहाँ तक आरोप लगाया कि भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने पुलिस स्टेशन के अंदर ही टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को होने वाली विशाल जनसभा को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। जगद्दल और भाटपारा जैसे संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की तैनाती कर दी गई है। पूरे इलाके में अलर्ट जारी किया गया है ताकि रैली के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके। फिलहाल, पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
भले ही सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हों, लेकिन इलाके में अभी भी भारी तनाव बना हुआ है। दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल एक-दूसरे पर राजनीतिक द्वेष और हिंसा फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। बंगाल की राजनीति में चुनाव से ठीक पहले हुई यह हिंसा दर्शाती है कि आगामी मतदान के चरणों में सुरक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती रहने वाली है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अब प्रधानमंत्री की रैली को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।
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