Dularchand Yadav Murder: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर मोकामा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हिंसा ने पूरे इलाके का माहौल तनावपूर्ण कर दिया है। मंगलवार दोपहर लगभग 3:30 बजे, मोकामा के तारतर गांव के पास जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड के लिए जदयू विधायक अनंत सिंह के समर्थकों पर आरोप लगे हैं। घटना उस समय हुई जब जनसुराज पार्टी और जदयू के काफिले आमने-सामने आए। दोनों पक्षों में कथित रूप से बहस और पत्थरबाजी शुरू हो गई। पुलिस के मुताबिक, मौके पर पहुंचने पर एक गाड़ी में दुलारचंद यादव का शव पड़ा था। शुरुआती आरोपों के अनुसार, पहले उनके पैर में गोली मारी गई और जख्मी होने के बाद उन्हें गाड़ी से कुचल दिया गया।
दुलारचंद यादव का नाम 80 और 90 के दशक में मोकामा और टाल क्षेत्र के दबंग नेता के रूप में जाना जाता था। उनके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे। 1991 में कांग्रेस नेता सीताराम सिंह हत्याकांड में भी उनका नाम आया था, जिसने उनकी छवि को और मजबूत किया।
अपने दबंग व्यक्तित्व के बावजूद, दुलारचंद यादव ने स्थानीय यादव समुदाय में एक मजबूत आधार बनाया। उन्हें समाज का संरक्षक और न्याय दिलाने वाले नेता के रूप में देखा जाता था। 1990 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के करीबी सहयोगी बने। मोकामा और टाल क्षेत्र में RJD की राजनीतिक जमीन मजबूत करने में उनका योगदान अहम रहा।
समय के साथ उनकी राजनीतिक निष्ठाएं बदलती रहीं, जो बिहार की अवसरवादी राजनीति को दर्शाती हैं। लोकदल से लेकर RJD तक और बाद में JDU तक, दुलारचंद यादव ने राजनीतिक समीकरणों को साधने की कला बखूबी अपनाई। 2022 में मोकामा उपचुनाव में उन्होंने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी का समर्थन किया और अपनी राजनीतिक लचीलापन साबित किया।
पुलिस ने अनंत सिंह, उनके दो भतीजों रणवीर और कर्मवीर सहित पांच लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। मृतक के परिवार का आरोप है कि पहले गोली मारी गई और फिर गाड़ी से कुचला गया। हालांकि, जदयू विधायक अनंत सिंह ने हत्या के आरोपों से इनकार किया और इसे राजद नेता सूरजभान सिंह की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि झगड़े की पहल दुलारचंद यादव ने की थी।दुलारचंद यादव की हत्या ने मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी तनाव को और बढ़ा दिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में कड़ी निगरानी और तनाव न बढ़े इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
दुलारचंद यादव की कहानी बिहार की बाहुबली राजनीति और क्षेत्रीय दबंगई का उदाहरण है। उनके जीवन ने दिखाया कि कैसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाला नेता समाज में संरक्षक के रूप में स्वीकार किया जा सकता है और राजनीति में अपनी जगह बना सकता है। उनकी हत्या ने न केवल मोकामा बल्कि पूरे बिहार की राजनीतिक सियासत में एक बड़ी हलचल मचा दी है।
मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनावी माहौल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस हत्याकांड ने चुनावी हिंसा और बाहुबली राजनीति की चिंता को और बढ़ा दिया है। पुलिस जांच जारी है और आगामी दिनों में मामले में नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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