नई दिल्ली@thetarget365 : डिजिटल युग में आज के समय में भारत के अधिकतर युवा कैश रखना पसंद नहीं करते हैं। जी हां डिजिटल पेमेंट युवाओं को बेहद भा रहा है और हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है। इतना ही नहीं दुनिया के कई देशों ने भारत के यूपीआई पेमेंट सिस्टम को अपनाया है, जिसका असर भी देखने को मिल रहा है। लेकिन इस बीच यूपीआई यूजर्स के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दरअसल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया यानी PCI ने डिजिटल पेमेंट के नियमों पर विचार करने की मांग की है। बता दें कि अब तक भारत में ये सेवा फ्री है।
मिली जानकारी के अनुसार पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर यूपीआई पेमेंट और रूपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर लागू जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR में पुनर्विचार करने की मांग की है। MDR के पत्र के अनुसार फोनपे, गूगलपे और पेटीएम का इस्तेमाल कर किए जाने वाले डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगाने की मांग की गई है। हालांकि इस मामले में सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।
MDR की ओर से पीएम मोदी को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि सरकार को डिजिटल पेमेटं इकोसिस्टम की मौजूदा जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए, जो कि जीरो एमडीआर पॉलिसी की वजह से काफी दबाव का सामना कर रही है। इस पॉलिसी को जनवरी 2020 में लागू किया गया था।
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की तरफ से डिजिटल पमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयास की तरीफ की। हालांकि PCI का मानना है कि यूपीआई पेमेंट और रूपे डेबिट पेमेंट पर जीरो एमडीआर पॉलिसी लागू करने के लिए सरकार 1,500 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता देती है, जो कि अनुमानित 10,000 करोड़ रुपये की वार्षिक लागत से काफी कम है। ऐसे में जीरो एमडीआर चार्ज में बदलाव की जरूरत का जिक्र किया गया है।
इस चुनौती से निपटने के लिए PCI ने सभी कारोबारियों के लिए रूपे डेबिट कार्ड पर MDR लागू करने और बड़े कारोबारियों की ओर से यूपीआई लेनदेन पर 0.3 फीसद MDR शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। मौजूदा वक्त में अन्य डिजिटल पेमेंट जैसे क्रेडिट कार्ड पर करीब 2 फीसद और गैर-रूपे डेबिट कार्ड पर करीब 0.9 फीसद की दर से MDR चार्ज लगाया जाता है। PCI का मानना है कि यूपीआई पेमेंट में कोई दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि कारोबारी पहले से MDR के आदी हैं।
PCI ने मामले में पीएम मोदी से दखल देने की मांग की है। ऐसा दावा किया गया है कि भारत में करीब 6 करोड़ व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकारते हैं। इसमें से 90 फीसद को भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने छोटे व्यापारी माना है, जिनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपए या उससे कम है। वही करीब 50 लाख कारोबारी बड़ी कैटेगरी में आते हैं।
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