Winter Session Bills
Winter Session Bills: संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलने वाला है। 19 दिनों में कुल 15 बैठकें निर्धारित की गई हैं। इसी बीच लोकसभा बुलेटिन में जानकारी दी गई है कि इस सत्र में सरकार कुल 10 नए महत्वपूर्ण बिल पेश कर सकती है। इन विधेयकों में एटॉमिक एनर्जी बिल और हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल जैसे बड़े बदलाव शामिल हैं, जो देश के ऊर्जा, शिक्षा, कॉरपोरेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों पर दीर्घकालिक असर डालने वाले हैं।
लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, एटॉमिक एनर्जी बिल इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण विधेयक माना जा रहा है। यह बिल भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग, नियंत्रण और नियमन से जुड़े प्रावधानों को नए सिरे से परिभाषित करेगा। अभी तक देश में सभी न्यूक्लियर पॉवर प्लांट केवल सरकारी कंपनियों जैसे NPCIL के नियंत्रण में स्थापित किए जाते हैं। लेकिन नए बिल के लागू होने पर भारतीय और विदेशी निजी कंपनियों को भी न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने और परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में काम करने की अनुमति मिल जाएगी। यह कदम भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।
सत्र में पेश होने वाला दूसरा महत्वपूर्ण विधेयक हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल है। इस बिल का उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में सुधार लााना और इसे अधिक पारदर्शी, सरल एवं स्वतंत्र बनाना है। प्रस्तावित बिल के अनुसार UGC, AICTE और NCTE जैसी प्रमुख संस्थाओं को समाप्त कर उनकी जगह एक एकीकृत ‘हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया’ का गठन किया जाएगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी और शिक्षा क्षेत्र में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
सरकार सत्र में नेशनल हाईवे (संशोधन) बिल भी पेश करेगी। इस बिल का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाना है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में हो रही देरी को कम किया जा सके। इससे सड़क निर्माण गति पकड़ेगा और बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी।
सरकार कॉरपोरेट लॉ (संशोधन) बिल, 2025 भी पेश करने वाली है। यह बिल कंपनी अधिनियम 2013 और LLP अधिनियम 2008 में बदलाव करेगा। इसका लक्ष्य देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना और कंपनियों के लिए कानूनी प्रावधानों को सरल एवं आधुनिक बनाना है। इससे स्टार्टअप्स और कॉरपोरेट संस्थाओं को संचालन में सुगमता मिलेगी।सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल, 2025 भी इस सत्र में लाया जाएगा। इसका उद्देश्य सेबी एक्ट, डिपॉजिटरीज एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट को मिलाकर एक ही समग्र कानून बनाना है। इससे शेयर बाजार और वित्तीय लेन-देन से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट और सरल हो जाएंगे।
संसद में संविधान का 131वां संशोधन भी प्रस्तावित है। इसके तहत चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाएगा, जिससे केंद्र सरकार को वहां के लिए विशेष नियम बनाने की शक्ति मिल जाएगी। इन नियमों को कानून का दर्जा प्राप्त होगा।सरकार ऑर्बिट्रेशन एंड कॉन्सीलिएशन (अमेंडमेंट) बिल, 2025 भी पेश कर सकती है। इसका उद्देश्य मध्यस्थता फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना है, ताकि कंपनियों और व्यक्तियों के बीच कानूनी विवाद वर्षों तक लंबित न रहें।
इससे पहले मई-जुलाई का मानसून सत्र विपक्ष के भारी हंगामे के कारण लगभग ठप रहा था। लोकसभा में 120 घंटे निर्धारित चर्चा समय में केवल 37 घंटे ही कार्यवाही हो पाई, जबकि राज्यसभा में केवल 41 घंटे चर्चा हुई। कुल 27 बिल पारित हुए और गिरफ्तार PM-CM को पद से हटाने संबंधी संविधान संशोधन बिल सबसे अधिक चर्चा में रहा।
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