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Octopus Evolution: दुनिया के सबसे पुराने ऑक्टोपस का दावा निकला गलत, नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों को चौंकाया।

Octopus Evolution:  लंदन से आई एक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने जीव विज्ञान की दुनिया में खलबली मचा दी है। जिस समुद्री जीव को दशकों से ‘दुनिया का सबसे पुराना ऑक्टोपस’ माना जा रहा था, वह असल में कुछ और ही निकला। लगभग 30 करोड़ साल पुराने इस जीवाश्म से अब सबसे प्राचीन ऑक्टोपस होने का गौरव छिन गया है। वैज्ञानिकों की नवीनतम रिसर्च में यह प्रमाणित हुआ है कि यह जीव ऑक्टोपस परिवार का सदस्य नहीं, बल्कि ‘नौटिलस’ (कठोर खोल वाला समुद्री जीव) का एक करीबी रिश्तेदार था। इस जीव का वैज्ञानिक नाम ‘पोल्सेपिया माजोनेन्सिस’ है, जिसे अब तक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी सबसे पुराने ऑक्टोपस के रूप में मान्यता प्राप्त थी।

माजोन क्रीक की खोज और विवादित जीवाश्म का इतिहास

यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के प्रख्यात जूलॉजिस्ट थॉमस क्लेमेंट्स के नेतृत्व में यह शोध संपन्न हुआ है। उन्होंने बताया कि यह जीवाश्म लंबे समय से शोधकर्ताओं के बीच चर्चा और विवाद का केंद्र रहा है। यह फॉसिल अमेरिका के इलिनॉयस राज्य के प्रसिद्ध माजोन क्रीक इलाके में पाया गया था, जो डायनासोर युग से भी पहले के प्राचीन अवशेषों के लिए जाना जाता है। क्लेमेंट्स के अनुसार, इस जीवाश्म को समझना हमेशा से एक चुनौती रही है क्योंकि यह देखने में सफेद धुंधले ढांचे जैसा प्रतीत होता है। आकार में यह लगभग एक वयस्क इंसान के हाथ के बराबर था और अपनी बनावट के कारण पहली नजर में गहरे समुद्र में पाए जाने वाले ऑक्टोपस जैसा ही दिखता था।

समय के अंतराल ने वैज्ञानिकों के मन में पैदा किया संदेह

साल 2000 में जब पहली बार इस जीवाश्म को ‘ऑक्टोपस’ घोषित किया गया था, तो इसने विकासवाद के सिद्धांतों में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था। इस खोज से यह संकेत मिला कि ऑक्टोपस का विकास अनुमान से कहीं अधिक पहले हो चुका था। दरअसल, दुनिया में ज्ञात दूसरा सबसे पुराना ऑक्टोपस जीवाश्म मात्र 9 करोड़ साल पुराना है। 30 करोड़ साल और 9 करोड़ साल के बीच का यह विशाल अंतर (लगभग 21 करोड़ वर्ष) वैज्ञानिकों के गले नहीं उतर रहा था। इसी संदेह के चलते क्लेमेंट्स और उनकी टीम ने आधुनिक ‘सिंक्रोट्रॉन’ तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया, जो तीव्र प्रकाश पुंज की मदद से पत्थर के भीतर छिपी सूक्ष्म संरचनाओं को उजागर कर देती है।

दांतों की संरचना ने खोल दी पहचान की सारी परतें

जब वैज्ञानिकों ने सिंक्रोट्रॉन तकनीक के जरिए जीवाश्म के आंतरिक अंगों का विश्लेषण किया, तो सच्चाई सामने आ गई। उन्हें इस जीव के ‘रैड्युला’ (दांतों की विशेष पंक्ति) का पता चला। शोध में पाया गया कि इस जीव की हर पंक्ति में 11 दांत थे। जीव विज्ञान के अनुसार, ऑक्टोपस की प्रजातियों में आमतौर पर केवल 7 या 9 दांत ही होते हैं। अधिक दांतों का होना इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि यह ऑक्टोपस नहीं हो सकता। इन दांतों की बनावट ‘पेलियोकैडमस पोहली’ नामक एक अन्य नौटिलस जीवाश्म से पूरी तरह मेल खाती थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि मरने के बाद सड़ने की प्रक्रिया के दौरान इस जीव का कठोर खोल अलग हो गया होगा, जिस कारण इसे गलती से ऑक्टोपस समझ लिया गया।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में बदलाव और म्यूजियम की नई उपलब्धि

यह महत्वपूर्ण शोध ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसके बाद ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने त्वरित संज्ञान लेते हुए घोषणा की है कि वे ‘सबसे पुराने ऑक्टोपस’ का पुराना रिकॉर्ड हटा देंगे और नए वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा करेंगे। गिनीज के मैनेजिंग एडिटर एडम मिलवर्ड ने इसे एक ऐतिहासिक खोज करार दिया है। इस जीवाश्म को शिकागो के फील्ड म्यूजियम में संरक्षित किया गया है। शोधकर्ता क्लेमेंट्स का कहना है कि भले ही ऑक्टोपस का तमगा छिन गया हो, लेकिन म्यूजियम को गर्व होना चाहिए क्योंकि अब उनके पास ‘दुनिया का सबसे पुराना सॉफ्ट-टिश्यू नौटिलस’ होने का दुर्लभ रिकॉर्ड है।

विकासवादी विज्ञान की एक नई दिशा

इस खोज ने न केवल एक गलत पहचान को सुधारा है, बल्कि समुद्री जीवों के विकास क्रम की हमारी समझ को भी बेहतर बनाया है। यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक और गहराई से किया गया वैज्ञानिक विश्लेषण किस तरह पुरानी मान्यताओं को चुनौती दे सकता है। अब वैज्ञानिक नए सिरे से यह खोज करने में जुटेंगे कि आखिर दुनिया का सबसे पुराना वास्तविक ऑक्टोपस कौन सा था। इस रिसर्च ने यह भी साफ कर दिया है कि जीवाश्म विज्ञान में केवल बाहरी बनावट पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सूक्ष्म आंतरिक जांच ही सत्य तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग है।

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