Yemen War 2026
Yemen War 2026: मध्य पूर्व के दो सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली देश, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अचानक एक-दूसरे के कट्टर विरोधी बनकर उभरे हैं। दशकों की रणनीतिक दोस्ती के बाद, यमन के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव इस कदर बढ़ गया है कि सऊदी अरब ने यूएई को मात्र 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है। रियाद ने चेतावनी दी है कि यदि यूएई ने यमन से अपने पैर पीछे नहीं खींचे, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने पूरी दुनिया और विशेष रूप से अरब देशों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि इन दोनों देशों के बीच टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा।
सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि संयुक्त अरब अमीरात यमन के अलगाववादी समूहों को गुपचुप तरीके से आधुनिक हथियारों और सैन्य वाहनों की आपूर्ति कर रहा है। हाल ही में सऊदी वायुसेना ने यमन के बंदरगाही शहर ‘मुकल्ला’ पर भीषण बमबारी की। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, यह हमला यूएई द्वारा भेजी गई हथियारों की एक बड़ी खेप को नष्ट करने के लिए किया गया था। सऊदी अरब का दावा है कि ये हथियार यूएई के फुजैराह बंदरगाह से भेजे गए थे और इन्हें ट्रैक होने से बचाने के लिए जहाजों के ट्रैकिंग डिवाइस तक बंद कर दिए गए थे। रियाद के मुताबिक, यूएई की ये हरकतें सऊदी अरब की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘अत्यधिक खतरनाक’ खतरा बन गई हैं।
सऊदी अरब ने अबू धाबी को दिए 24 घंटे के अल्टीमेटम में स्पष्ट शर्तें रखी हैं। रियाद ने मांग की है कि यूएई यमन से अपने सभी भाड़े के सैनिकों (mercenaries) और नियमित सेना को तत्काल वापस बुलाए। इसके अतिरिक्त, यमन के भीतर सक्रिय विभिन्न विद्रोही गुटों को दी जा रही हर तरह की सैन्य और वित्तीय सहायता को तुरंत बंद किया जाए। पिछले कुछ हफ्तों में यूएई समर्थित गुटों और सऊदी समर्थित बलों के बीच सीधी भिड़ंत हुई है, जिससे हूती विद्रोहियों के खिलाफ बना साझा गठबंधन पूरी तरह बिखर गया है। सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं और हितों के किसी भी उल्लंघन का पुरजोर जवाब देगा।
सऊदी सेना द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि मुकल्ला बंदरगाह पर की गई कार्रवाई एक ‘सीमित हवाई हमला’ था। यह हमला उन हथियारों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाने के लिए किया गया था जिन्हें यूएई के जहाजों ने हाल ही में वहां उतारा था। सऊदी अरब ने तर्क दिया कि ये हथियार शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा खतरा थे। हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर अभी स्पष्ट नहीं है। सऊदी सेना ने यह भी कहा कि नागरिक संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए इस ऑपरेशन को रात के अंधेरे में अंजाम दिया गया। फिलहाल, यूएई ने इस हमले और आरोपों पर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यमन के हूती-विरोधी बलों ने भी अब यूएई के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। उन्होंने आपातकाल की घोषणा करते हुए अमीराती बलों को 24 घंटे के भीतर इलाका खाली करने का आदेश दिया है। साथ ही, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के प्रवेश मार्गों को सील कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल यमन का विवाद नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में रियाद और अबू धाबी के बीच बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नतीजा है। दोनों देश मध्य पूर्व का निर्विवाद नेता बनने की होड़ में हैं। यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह शीत युद्ध एक बड़े सैन्य संघर्ष में तब्दील हो सकता है।
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