Yogi vs Avimukteshwaranand
प्रयागराज के पावन माघ मेले में इस समय भक्ति की धारा के साथ-साथ बयानों की अग्नि भी प्रज्वलित हो रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल ही में दिए गए ‘कालनेमी’ वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अत्यंत कड़ा पलटवार किया है। शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें ‘बयानवीर’ बनने के बजाय हकीकत पर ध्यान देना चाहिए। यह विवाद जो महज एक स्नान पर्व के मार्ग को लेकर शुरू हुआ था, अब असली-नकली संत की परिभाषा और सनातन धर्म की व्याख्या तक पहुँच गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब देश की जनता भली-भांति जान चुकी है कि असल में कालनेमी कौन है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संन्यासी और व्यक्तिगत संपत्ति वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे स्वयं किसी प्रकार का भौतिक सुख नहीं भोग रहे हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ सत्ता की राज गद्दी पर विराजमान हैं। उन्होंने कहा, ‘योगी जी योगी हैं, लेकिन उनकी गर्दन उनके अधिकारियों ने फंसा दी है। अधिकारियों ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।’ शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके साथ जो दुर्व्यवहार किया, वह एक अपराध है और मुख्यमंत्री को उस पर संज्ञान लेना चाहिए था, न कि उपदेश देने चाहिए थे। उन्होंने यह भी तंज कसा कि 12 साल सत्ता में रहने के बाद भी गौ-हत्या नहीं रुक पाई, जिसके लिए मुख्यमंत्री जवाबदेह हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई घटना है। प्रशासन ने शंकराचार्य की पालकी को रोक दिया था, जिसके बाद मेला प्राधिकरण ने उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया। नोटिस में उनके शंकराचार्य होने के प्रमाण मांगे गए और उन पर बैरियर तोड़ने का आरोप लगाया गया। इस पर आक्रोश जताते हुए स्वामी जी ने कहा कि वे 40 साल से मेले में आ रहे हैं, प्रशासन चाहे तो उनका शिविर उखाड़ कर फेंक दे, वे फुटपाथ पर बैठने को भी तैयार हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि मात्र कुछ छोटे पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने से यह मामला शांत नहीं होगा, क्योंकि नोटिस के पीछे उन्हें गहरी दुर्भावना दिखाई देती है।
दरअसल, इस विवाद को हवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान से मिली जो उन्होंने प्रयागराज से दूर हरियाणा के सोनीपत में दिया था। वहां उन्होंने संत के धर्म और कर्म की व्याख्या करते हुए कहा था कि एक संन्यासी के लिए राष्ट्र और धर्म से ऊपर कुछ नहीं होता और उसकी अपनी कोई व्यक्तिगत प्रॉपर्टी नहीं होती। उन्होंने सावधान करते हुए कहा था कि समाज में ऐसे तमाम ‘कालनेमी’ घूम रहे हैं जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। हालांकि योगी ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन माघ मेले के घटनाक्रम को देखते हुए इसे सीधे तौर पर अविमुक्तेश्वरानंद से जोड़कर देखा गया।
जब विवाद बढ़ता दिखा, तो उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बीच-बचाव की कोशिश की। उन्होंने आजमगढ़ से शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करते हुए उनसे प्रार्थना की कि वे अपना धरना समाप्त करें और बसंत पंचमी का पावन स्नान करें। हालांकि, इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधना नहीं छोड़ा और कहा कि बीजेपी का ग्राफ बढ़ रहा है जबकि ‘टोपी वाले’ गायब हो रहे हैं। फिलहाल, प्रयागराज के संगम तट पर तनाव बरकरार है। शंकराचार्य ने बसंत पंचमी का स्नान न करने का ऐलान कर दिया है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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