Yusuf Pathan News : पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद यूसुफ पठान एक बार फिर जमीन विवाद को लेकर चर्चा में हैं। गुजरात के वडोदरा नगर निगम ने उनके लिए एक आवासीय भूखंड आवंटित करने का प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत कुल 978 वर्गमीटर जमीन में से 500 वर्गमीटर हिस्सा मुफ्त देने और बाकी 478 वर्गमीटर जमीन निर्धारित मूल्य पर 45 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इस मामले पर 23 अक्टूबर को नगर निगम की स्थायी समिति में विचार किया जाना है।
978 वर्गमीटर जमीन के प्रस्ताव में क्या है खास?
नगर निगम आयुक्त की ओर से पेश प्रस्ताव के अनुसार, भूखंड के 500 वर्गमीटर हिस्से को यूसुफ पठान को उपहार के रूप में देने की योजना है। शेष 478 वर्गमीटर जमीन की कीमत वडोदरा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी की मूल्यांकन समिति द्वारा निर्धारित दर के 55 प्रतिशत के बराबर रखी जाएगी। इसका मतलब है कि बाकी जमीन पर उन्हें 45 प्रतिशत की रियायत मिल सकती है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम मंजूरी के इंतजार में है।
2012 से चल रहा है जमीन का विवाद
विवादित भूखंड वडोदरा के तांदलजा इलाके में स्थित है और यूसुफ पठान के परिवार के घर के पास बताया जाता है। पठान वर्ष 2012 से इस जमीन को खरीदने की मांग कर रहे थे। शुरुआत में वडोदरा नगर निगम ने जमीन बेचने के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, लेकिन गुजरात सरकार ने 2014 में इसे मंजूरी नहीं दी। इसके बाद मामला लंबे समय तक विवादों में बना रहा और जमीन के आवंटन को लेकर कानूनी तथा प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रही।
सांसद बनने के बाद जारी हुआ था नोटिस
वर्ष 2024 में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद यूसुफ पठान को नगर निगम की जमीन से जुड़े कथित अतिक्रमण के मामले में नोटिस जारी किया गया था। निगम ने उन्हें कथित अतिक्रमण हटाने और जमीन खाली करने को कहा था। इस कार्रवाई के बाद पुराना जमीन विवाद फिर सुर्खियों में आ गया।
गुजरात हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला
नगर निगम के नोटिस को यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि मामला एक दशक से अधिक पुराना है और कार्रवाई से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित जमीन राज्य सरकार की नहीं, बल्कि नगर निगम की है। हालांकि, हाईकोर्ट ने जमीन आवंटित करने के अनुरोध को खारिज करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा।इसके बाद पठान ने खंडपीठ में अपील की। इस साल अगस्त में उनके वकील ने अदालत को बताया कि वह राज्य सरकार की नीति के तहत अपना दावा आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसके बाद अपील वापस लेने की अनुमति मिलने पर मामला समाप्त हो गया।
23 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजरें
अब नगर निगम आयुक्त के नए प्रस्ताव ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। स्थायी समिति यदि 23 अक्टूबर को प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि यूसुफ पठान को जमीन मिलना तय हो गया है। समिति के फैसले से ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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