छत्तीसगढ़

Bijapur Surrender: बीजापुर में 51 माओवादी कैडरों का सामूहिक आत्मसमर्पण, 9 महिलाएं भी शामिल

Bijapur Surrender: छत्तीसगढ़ की माओवादी उन्मूलन नीति को बीजापुर जिले में बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार की प्रभावी ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना के तहत 51 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में पीएलजीए बटालियन और कंपनी के सदस्य शामिल हैं, जिन्हें माओवादी संगठन की रीढ़ माना जाता है।

इन 51 कैडरों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। आत्मसमर्पण करने वालों में 42 पुरुष और 9 महिलाएं शामिल हैं। इस समूह में चार ऐसे दुर्दांत सदस्य भी शामिल हैं, जिन पर अकेले 8-8 लाख रुपये का इनाम था। इनमें पीएलजीए कंपनी न. 01 सदस्य बुधराम पोटाम उर्फ रंजीत, बटालियन न. 01 सदस्य मनकी कोवासी, कंपनी न. 2 सदस्य हुंगी सोढ़ी और सदस्य रविन्द्र पुनेम उर्फ आयतू शामिल हैं। इसके अलावा सीआरसी कंपनी 02 पीएलजीए सदस्य देवे करटाम पर भी 8 लाख रुपये का ईनाम था।

सुरक्षाबलों के निरंतर अभियान और सरकार की समर्पण नीति का असर वर्ष 2025 में विशेष रूप से दिखाई दे रहा है। जिले में अब तक 461 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इस साल सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 138 माओवादी मारे गए और 485 गिरफ्तार हुए हैं। यह आंकड़े छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों पर नियंत्रण और पुनर्वास नीति की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक डा. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को तत्काल 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने शेष माओवादियों से अपील की है कि वे भ्रामक विचारधाराओं को त्यागें और समाज की मुख्यधारा में लौटें। डा. यादव ने कहा, “संवाद, पुनर्वास और विकास का मार्ग ही क्षेत्र में स्थायी शांति ला सकता है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के सामूहिक आत्मसमर्पण से न केवल सुरक्षा स्थिति में सुधार होता है, बल्कि स्थानीय लोगों में विश्वास और शासन प्रणाली की पकड़ भी मजबूत होती है। राज्य सरकार ने पुनर्वास और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से यह संदेश दिया है कि हिंसा छोड़ने वाले लोगों के लिए मुख्यधारा में लौटने का रास्ता सुरक्षित और सम्मानजनक है।

बीजापुर में 51 माओवादी कैडरों का सामूहिक आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ में शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। पुनर्वास और विकास पर आधारित नीति ने यह साबित कर दिया है कि संवाद और सकारात्मक प्रोत्साहन से हिंसा पर काबू पाया जा सकता है। राज्य सरकार का यह प्रयास न केवल माओवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा, बल्कि क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की नींव भी मजबूत करेगा।

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