Tharoor on Kiren Rijiju : केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के विपक्षी प्रदर्शनों को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि भारत की तुलना बांग्लादेश या फ्रांस से करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और यहां होने वाले विरोध प्रदर्शनों को दूसरे देशों की घटनाओं के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत में हिंसा नहीं, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन
शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष हिंसा का समर्थन नहीं करते। उन्होंने फ्रांस में बसों और पुलिस स्टेशनों में आगजनी जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में अपनी बात रखने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन यह विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। थरूर ने कहा कि वह खुद भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेते रहे हैं और विपक्ष सामान्य तौर पर इसी लोकतांत्रिक तरीके का समर्थन करता है।
‘रेजीम चेंज’ के आरोपों पर थरूर का पलटवार
कांग्रेस सांसद ने विपक्ष के आंदोलन को सत्ता परिवर्तन की कोशिश बताने वाले आरोपों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य किसी सरकार को गिराना नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। थरूर के अनुसार, लोकतंत्र में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए तथा चुनाव कराने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार काम करें। उन्होंने विपक्ष की मांग को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताया।
मतदाता सूची से नाम हटने पर जताई चिंता
थरूर ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि नाम हटाने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को दूर करना आवश्यक है। उनके मुताबिक, यदि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो जाते हैं, तो उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने इस मामले को संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा कि विपक्ष इसी प्रक्रिया को दुरुस्त करने की मांग कर रहा है। हालांकि, नाम हटाए जाने से संबंधित आरोपों और प्रक्रिया की वैधता का अंतिम आकलन संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।
लोकतंत्र की रक्षा हर नागरिक का अधिकार
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकतंत्र किसी व्यक्ति या सरकार की ओर से दी गई भेंट नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों की साझा जिम्मेदारी और अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय को लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा करने तथा संवैधानिक संस्थाओं से जवाबदेही मांगने का अधिकार है। थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के अस्तित्व पर नहीं, बल्कि उनके कामकाज और आचरण को लेकर है। उन्होंने संस्थाओं से संविधान के अनुरूप निष्पक्ष व्यवहार करने की अपेक्षा जताई।
रिजिजू ने विपक्ष पर लगाए थे गंभीर आरोप
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश और फ्रांस की घटनाओं से की थी। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ राजनेता और भारत-विरोधी ताकतें देश में अशांति फैलाने की साजिश कर रही हैं। रिजिजू ने दावा किया था कि युवाओं को भड़काकर हिंसा, आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाएं कराने की कोशिश हुई। इन आरोपों पर थरूर की प्रतिक्रिया ने चुनावी निष्पक्षता, शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
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