Ambikapur News : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर से परेशान 54 वर्षीय महिला को आधुनिक चिकित्सा तकनीक से राहत मिली है। जीवन ज्योति सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में पहली बार मिनिमली इनवेसिव काइफोप्लास्टी सर्जरी की गई। अस्पताल के अनुसार, न्यूरो-नेविगेशन तकनीक की मदद से हुई इस प्रक्रिया के अगले दिन महिला चलने में सक्षम हो गईं। उत्तरी छत्तीसगढ़ में स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
खेत में काम करते समय पीठ में उठा तेज दर्द
अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, महिला खेत में काम कर रही थीं, तभी उनकी पीठ में अचानक झटका लगा। इसके बाद कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द शुरू हो गया। दर्द इतना अधिक था कि उनके लिए खड़ा होना और चलना-फिरना मुश्किल हो गया। चिकित्सकीय जांच के दौरान उनकी स्थिति का आकलन किया गया और आगे की जांच में रीढ़ की हड्डी के D12 और L1 स्तर पर कम्प्रेशन फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने की सर्जरी
जांच रिपोर्ट और मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी का निर्णय लिया। 16 अक्टूबर 2026 को जीवन ज्योति सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) एम. के. तिवारी और उनकी टीम ने न्यूरो-नेविगेशन की सहायता से मिनिमली इनवेसिव काइफोप्लास्टी की। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, अंबिकापुर में इस तकनीक से की गई यह पहली सर्जरी है।
ऑपरेशन के अगले दिन चलने लगीं महिला
अस्पताल के मुताबिक, सर्जरी के बाद महिला की स्थिति में सुधार हुआ और वह अगले ही दिन चलने में सक्षम हो गईं। चिकित्सकीय निगरानी और मूल्यांकन के बाद उन्हें कुछ ही दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। लंबे समय से नहीं, बल्कि अचानक शुरू हुए गंभीर दर्द और चलने में परेशानी के बीच यह सुधार मरीज के लिए राहत भरा रहा। हालांकि, ऐसे उपचार के परिणाम हर मरीज की स्थिति और फ्रैक्चर के प्रकार पर निर्भर करते हैं।
क्या होती है मिनिमली इनवेसिव काइफोप्लास्टी?
काइफोप्लास्टी रीढ़ की हड्डी के कुछ प्रकार के कम्प्रेशन फ्रैक्चर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है। इसमें छोटे चीरे के माध्यम से विशेष उपकरणों की मदद से प्रभावित हड्डी तक पहुंचा जाता है। उपयुक्त मरीजों में फ्रैक्चर वाले हिस्से को स्थिर करने के लिए बोन सीमेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य दर्द कम करना और हड्डी को स्थिरता देना है। हालांकि, यह प्रक्रिया प्रत्येक प्रकार के फ्रैक्चर के लिए उपयुक्त नहीं होती।
न्यूरो-नेविगेशन तकनीक से मिली सटीकता में मदद
इस सर्जरी में न्यूरो-नेविगेशन तकनीक का उपयोग किया गया। यह तकनीक चिकित्सकों को रीढ़ की संरचना और प्रक्रिया के दौरान उपकरणों की स्थिति समझने में मार्गदर्शन देती है। इससे जटिल स्पाइनल प्रक्रियाओं को अधिक सटीकता से करने में मदद मिल सकती है। उपचार का चयन मरीज की जांच, फ्रैक्चर की गंभीरता और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाता है।
अंबिकापुर में न्यूरोसर्जरी सुविधाओं का विस्तार
जीवन ज्योति सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का न्यूरोसर्जरी विभाग मस्तिष्क, रीढ़ और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं के उपचार की सेवाएं उपलब्ध कराता है। विभाग में लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) एम. के. तिवारी के नेतृत्व में न्यूरोसर्जिकल उपचार किया जाता है। अंबिकापुर में इस प्रक्रिया का सफलतापूर्वक किया जाना क्षेत्र में आधुनिक स्पाइन सर्जरी की सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन ने टीम को दी बधाई
अस्पताल प्रबंधन ने इस उपलब्धि के लिए न्यूरोसर्जन, सर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ और ऑपरेशन थिएटर टीम के योगदान की सराहना की। प्रबंधन के अनुसार, मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इस उपलब्धि से क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं के आधुनिक उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। पीठ में तेज दर्द या चलने में परेशानी होने पर समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।