CJP News : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत मिलने का इंतजार और बढ़ गया है। विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत पांच दिन और बढ़ाने की मांग की थी। अदालत के आदेश के बाद दोनों नेताओं को वापस तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब उनकी जमानत से जुड़ी अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।
जमानतदार के दस्तावेजों में विसंगति का मामला
दोनों नेताओं के वकील धर्मवीर के मुताबिक, जमानत प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों में कथित विसंगति सामने आने के कारण जमानतदार के कागजात स्वीकार नहीं किए गए। उन्होंने बताया कि नया जमानत बॉन्ड पेश किए जाने के बावजूद सुरक्षा अधिकारी ने दस्तावेजों में बेमेल होने की बात कही। वकील के अनुसार, इस मुद्दे पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा और जमानत बॉन्ड दोबारा प्रस्तुत करने की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल, दोनों नेताओं की रिहाई को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
CJP ने चार जमानतदारों को खारिज करने का लगाया आरोप
इससे पहले CJP की ओर से दावा किया गया था कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए पेश किए गए चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से स्वीकार नहीं किया गया। पार्टी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, जमानत से संबंधित दस्तावेजों में विसंगति का मुद्दा सामने आया है। मामले में आगे की स्थिति अदालत और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मजिस्ट्रेट को कथित धमकी के मामले में रिपोर्ट दर्ज
इसी बीच, सुनवाई कर रहे विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट दर्ज की है। इस घटनाक्रम ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कथित धमकी देने वाले कौन थे और उसका जमानत की सुनवाई से कोई सीधा संबंध है या नहीं।
सुनवाई में देरी को लेकर CJP संस्थापक का आरोप
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार दोनों नेताओं की कथित अवैध गिरफ्तारी को लंबा खींच रही है। उन्होंने दावा किया कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई रोकने के लिए अदालती प्रक्रिया में देरी की जा रही है। दीपके के अनुसार, दोनों नेताओं को हिरासत में रखने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। हालांकि, ये पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इन पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया तथा न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग हो सकते हैं।
रत्ना सिंह ने भी उठाए कार्यवाही पर सवाल
पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने भी दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर सुनवाई में बाधा डालने का आरोप लगाया था। उनके मुताबिक, सुनवाई दोपहर 12 बजे निर्धारित थी, लेकिन संबंधित अधिकारी और सरकारी अभियोजक शाम करीब 5:30 बजे पहुंचे। रत्ना सिंह ने दावा किया कि रिहाई के मुद्दे पर चर्चा के बजाय मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेश का मामला उठाया गया। इन आरोपों पर अदालत की कार्यवाही और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
जंतर-मंतर पर प्रवेश के बाद हुई थी गिरफ्तारी
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। अगले दिन, 14 अक्टूबर को, उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। आरोप है कि दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर के बंद गेट को पार करके परिसर में प्रवेश किया था। यह कार्रवाई उस स्थान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद हुई थी। इस घटनाक्रम के बाद उनकी गिरफ्तारी और जमानत का मामला लगातार चर्चा में है।
SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन
CJP नेताओं का कहना है कि जंतर-मंतर परिसर में उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और नारे लगाए थे। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। CJP का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पार्टी जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का भी विरोध कर रही है। अब सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
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