Korba News : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सिकल सेल बीमारी से जूझ रहे 550 से अधिक मरीजों की पहचान की गई है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। बीमारी के उपचार और रोजमर्रा के खर्चों से परेशान परिवारों के लिए पेंशन तथा शिक्षा सहायता जैसी योजनाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण जरूरतमंदों तक इनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
पेंशन के लिए आवेदन जारी, मरीजों को लाभ मिलने पर सवाल
जिले में सिकल सेल से प्रभावित मरीजों को दिव्यांगता के आधार पर पेंशन दिलाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक किसी मरीज को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों की पहचान के बाद उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या है सिकल सेल बीमारी और क्यों बढ़ती हैं परेशानियां?
सिकल सेल एक आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारी है। इसमें लाल रक्त कोशिकाओं का आकार सामान्य से बदलकर हंसिए जैसा हो सकता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और मरीजों को दर्द, कमजोरी तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बीमारी की गंभीरता के अनुसार नियमित जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की जरूरत पड़ती है।
बार-बार इलाज से परिवारों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
सिकल सेल से पीड़ित लोगों को कई बार उपचार के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। इससे मरीजों के साथ उनके परिवारों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ता है। यदि मरीज पढ़ाई कर रहा हो या परिवार की आय सीमित हो, तो बीमारी का असर शिक्षा और घरेलू खर्चों पर भी पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी सरकारी सहायता जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।
जानकारी की कमी से योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी
जिले में मरीजों की पहचान और उपचार के प्रयासों के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी देना भी जरूरी है। कई परिवारों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया, पात्रता की शर्तों और जरूरी दस्तावेजों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग, ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के बीच समन्वय बढ़ाकर मरीजों को आवेदन से लेकर लाभ मिलने तक मदद उपलब्ध कराई जा सकती है।
पेंशन के लिए इन दस्तावेजों की पड़ सकती है जरूरत
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेंशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाना आवश्यक है। इसके अलावा आधार कार्ड, छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाणपत्र, आयु का प्रमाण, बीपीएल संबंधी दस्तावेज और बैंक या डाकघर की पासबुक तैयार रखनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र आवेदक ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्रों के आवेदक नगर निगम कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। वास्तविक पात्रता और दस्तावेजों की पुष्टि संबंधित कार्यालय से करना जरूरी है।
सिकल सेल प्रभावित विद्यार्थियों को कितनी छात्रवृत्ति?
बीमारी से प्रभावित बच्चों और युवाओं की पढ़ाई पर भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का असर पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी में प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए 150 रुपये प्रतिमाह, मिडिल स्कूल के लिए 170 रुपये प्रतिमाह और हाईस्कूल तथा हायर सेकेंडरी स्तर के लिए 190 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति का उल्लेख है। कॉलेज स्तर पर सालाना 6,000 रुपये सहायता दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।
पात्र मरीजों तक सहायता पहुंचाना प्रशासन के सामने चुनौती
कोरबा में सिकल सेल मरीजों के लिए सबसे बड़ी जरूरत केवल पहचान और उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र परिवारों को सरकारी सहायता से जोड़ना भी है। योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान, दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग और आवेदन की नियमित निगरानी से जरूरतमंदों को राहत मिल सकती है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन सुविधाओं को पात्र मरीजों और विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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