Marco Rubio India Visit : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को भारत के तीन दिवसीय दौरे पर मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार शुल्क, रूस से तेल खरीद और आव्रजन नीतियों को लेकर कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
26/11 हमले के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि
जयशंकर के साथ बैठक से पहले रुबियो ने मुंबई के ताज स्मारक पर पहुंचकर 26/11 आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इन हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों सहित कई लोगों की जान गई थी। रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि बैठक के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के महत्व पर चर्चा की।
भारत को बताया रिफाइनिंग महाशक्ति
रुबियो ने भारत की तेल शोधन क्षमता की सराहना करते हुए उसे ‘रिफाइनिंग महाशक्ति’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत भारी कच्चे तेल को शोधित करने में सक्षम है और वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में अधिक तेल आने पर भारतीय रिफाइनरियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला में भारत की तेल संबंधी हिस्सेदारी मौजूद है, जिसके जरिए उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
जामनगर में रिलायंस रिफाइनरी का दौरा करेंगे रुबियो
रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की रिफाइनरी का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल को उपयोगी ईंधन में बदलने के लिए रिफाइनिंग जरूरी है और रिलायंस के पास इस क्षेत्र में बड़ी क्षमता है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनी के साथ वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की जा सकती है। हालांकि, किसी नए समझौते या उत्पादन योजना की औपचारिक घोषणा नहीं की गई।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का रुख
भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि भारत लंबे समय से ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की इच्छा जताता रहा है। उनके अनुसार, भारत ने इस दिशा में अच्छी प्रगति की है, हालांकि ऊर्जा आपूर्ति में बदलाव रातोंरात संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। वेनेजुएला और अन्य देशों से ऊर्जा आपूर्ति की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब
रुबियो ने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। दोनों देश 2025 की शुरुआत से इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य शुल्क संबंधी विवादों को सुलझाना, गैर-टैरिफ बाधाएं कम करना और बाजार तक पहुंच बढ़ाना है। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर शुल्क शर्तें मिलें। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
यूक्रेन नीति पर रुबियो ने स्थिति स्पष्ट की
रुबियो ने कहा कि यूक्रेन को हथियार और खुफिया जानकारी देने की अमेरिकी नीति में बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करना चाहता है, क्योंकि इसमें लगातार लोगों की जान जा रही है। इंटरसेप्टर मिसाइलों की वैश्विक मांग का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों और विदेशों में तैनात बलों की सुरक्षा के लिए भी इनकी जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन को जानबूझकर सहायता से वंचित नहीं किया जा रहा है।
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