Chhattisgarh News : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त प्रयासों से राज्य नक्सलवाद के खतरे से मुक्त हुआ है और अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जगदलपुर के लालबाग मैदान में बस्तर दशहरा महोत्सव-2026 के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि माओवादी हिंसा के लंबे दौर का दर्द पीछे छोड़कर छत्तीसगढ़ नए अवसरों की ओर बढ़ रहा है।
केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा। इस दौरान क्षेत्र के लोगों को हिंसा और असुरक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से इस खतरे से मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उनके अनुसार, अब राज्य में विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं और लोगों के लिए बेहतर अवसर तैयार हो रहे हैं।
रामायण में आदिवासी समुदायों के योगदान का उल्लेख
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने रामायण का उल्लेख करते हुए आदिवासी समुदायों की ऐतिहासिक भूमिका पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि रावण पर विजय हासिल करने में केवल वानर सेना और ऋषि-मुनियों ने ही योगदान नहीं दिया था, बल्कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी समुदायों का भी योगदान रहा होगा। उनके इस कथन ने बस्तर की आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और समाज के महत्व को रेखांकित किया।
आदिवासी उद्यमियों को मिल रहीं नई सुविधाएं
राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्हें जानकारी दी गई है कि आदिवासी उद्यमियों को वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के प्रयास तेज किए गए हैं। उन्होंने इन पहलों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आर्थिक अवसरों का विस्तार होने से आदिवासी समुदायों को आत्मनिर्भर बनने और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद मिल सकती है।
विकसित भारत 2047 में आदिवासी युवाओं की अहम भूमिका
द्रौपदी मुर्मू ने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी युवा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। उन्होंने कहा कि समान विकास और सभी वर्गों तक अवसर पहुंचाने के प्रयास वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक होंगे। राष्ट्रपति के मुताबिक, युवाओं की भागीदारी, उद्यमिता और आर्थिक सशक्तीकरण राज्य की प्रगति को नई गति दे सकते हैं।
मां दंतेश्वरी के मंदिर में राष्ट्रपति ने की पूजा
बस्तर दशहरा महोत्सव के कार्यक्रम से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए और देशवासियों की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। मां दंतेश्वरी बस्तर की आराध्य देवी मानी जाती हैं और उनकी पूजा स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बस्तर की संस्कृति और विकास पर टिकी निगाहें
राष्ट्रपति का संबोधन बस्तर की सांस्कृतिक पहचान, आदिवासी समाज की भागीदारी और क्षेत्र के विकास की संभावनाओं पर केंद्रित रहा। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में शांति, रोजगार, शिक्षा और आर्थिक अवसरों का विस्तार महत्वपूर्ण विषय हैं। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि सरकारों के प्रयासों और आदिवासी युवाओं की सक्रिय भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम स्थापित करेगा और विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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