India Germany Partnership : केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच अनुसंधान, तकनीक और विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जर्मनी की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक प्रयोगशालाओं में किए गए शोध को कारखानों तक पहुंचाना और उसे व्यावहारिक समाधान में बदलना है। भारत जर्मनी के इस अनुभव से सीखकर अपनी विशाल आबादी, युवा प्रतिभा और उत्पादन क्षमता का उपयोग बड़े स्तर पर करना चाहता है।
प्रयोगशाला से कारखाने तक तकनीक पहुंचाने में जर्मनी की विशेषज्ञता
पीयूष गोयल के अनुसार, जर्मनी के अनुसंधान संस्थान बुनियादी शोध के साथ व्यावहारिक अनुसंधान में भी अहम भूमिका निभाते हैं। वहां उद्योगों की समस्याओं को समझकर उनके समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। गोयल ने कहा कि वह जर्मन संस्थानों के साथ संवाद करके यह समझना चाहते हैं कि अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल कैसे स्थापित किया जा सकता है। इस अनुभव से भारतीय अनुसंधान व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
फ्राउनहोफर संस्थानों और छोटे उद्योगों से सीखने का अवसर
गोयल ने जर्मनी के फ्राउनहोफर संस्थानों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां अनुसंधान की शुरुआत उद्योगों की वास्तविक जरूरतों को समझने से होती है और इसका उद्देश्य व्यावहारिक समाधान तैयार करना होता है। जर्मनी के छोटे और मध्यम आकार के कारोबार भी अनुसंधान के सहारे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाते हैं। ये कंपनियां युवाओं को प्रशिक्षित करने और कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती हैं।
व्यावसायिक प्रशिक्षण व्यवस्था से भारत को मिलेगा लाभ
केंद्रीय मंत्री ने जर्मनी की दोहरी व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली की सराहना की। इस व्यवस्था में युवाओं को शैक्षणिक शिक्षा के साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे तकनीकी बदलावों के अनुरूप कुशल कर्मचारी तैयार होते हैं। भारत भी ऐसी व्यवस्थाओं से सीखकर अपने युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं के मुताबिक प्रशिक्षित कर सकता है। गोयल ने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी और काम करने की क्षमता जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ मिलकर महत्वपूर्ण परिणाम दे सकती है।
भारत-यूरोपीय संघ एफटीए से खुलेंगे नए अवसर
गोयल ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच मजबूत संबंध, संस्थानों का सहयोग और कारोबारियों की साझेदारी अनुसंधान एवं विकास के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से भी आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बनी हैं। दोनों देश संयुक्त रूप से नई तकनीक विकसित करने, डिजाइन तैयार करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उपयोगी उत्पाद बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं।
भारतीय विनिर्माण से वैश्विक बाजारों तक पहुंच का लक्ष्य
मंत्री के मुताबिक, भारत ने कई मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनके माध्यम से उसकी पहुंच दुनिया के लगभग दो-तिहाई बाजारों तक हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक से डेढ़ साल में यह दायरा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। भारत में उत्पादन करके घरेलू मांग पूरी करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों को भी आपूर्ति की जा सकती है।
जर्मन इंजीनियरिंग और भारतीय प्रतिभा का साझा लाभ
पीयूष गोयल ने जर्मनी के अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत को भारत के साथ मिलकर काम करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि जर्मनी की सटीक इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की युवा प्रतिभा तथा प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता से जोड़ा जा सकता है। इससे नए उत्पादों और तकनीकी समाधानों का विकास होगा, जिनकी मांग भारत सहित दुनिया के अन्य बाजारों में भी हो सकती है। दोनों देशों की क्षमताओं को एक साथ लाकर वैश्विक जरूरतों को पूरा करना इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य है।
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