Air Pollution Health Effects: अक्टूबर का महीना शुरू होते ही मौसम में बदलाव आने लगता है। सुबह और शाम हल्की ठंडक महसूस होने के साथ कई शहरों में वायु गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। दिल्ली-NCR सहित प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में खराब हवा लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बन जाती है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक आंखों, गले और फेफड़ों को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य सर्दी, थकान या मौसमी एलर्जी समझकर अनदेखा कर देते हैं। इसलिए AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स पर नजर रखने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को पहचानना भी जरूरी है।
1. गले में खराश और लगातार खांसी होना
प्रदूषण बढ़ने पर गले में सूखापन, खराश और खांसी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण श्वसन तंत्र में जलन पैदा कर सकते हैं। अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों में परेशानी अधिक बढ़ सकती है। हालांकि, खांसी की वजह संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे या लगातार बढ़े, तो चिकित्सक से सलाह लेना उचित है।
2. आंखों में जलन, खुजली और पानी आना
खराब वायु गुणवत्ता का असर आंखों पर भी दिखाई दे सकता है। प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से आंखें लाल हो सकती हैं और उनमें जलन, खुजली या पानी आने की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति में आंखों को बार-बार रगड़ने से बचें। बाहर से लौटने के बाद चेहरा साफ करें। यदि आंखों में तेज दर्द हो, नजर धुंधली पड़े या परेशानी लगातार बनी रहे, तो नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।
3. सांस फूलना और सीने में जकड़न
यदि सामान्य कामकाज या थोड़ी दूर चलने पर भी सांस फूलने लगे, सीने में जकड़न महसूस हो या सांस लेते समय घरघराहट सुनाई दे, तो इसे हल्के में न लें। प्रदूषण फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नए लक्षण सामने आने पर चिकित्सकीय जांच कराएं। गंभीर सांस की तकलीफ या सीने में दर्द होने पर तत्काल आपातकालीन सहायता लें।
4. सिरदर्द, सुस्ती और थकान महसूस होना
प्रदूषण वाले दिनों में कुछ लोगों को सिरदर्द, थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है। हालांकि, इन लक्षणों की वजह केवल खराब हवा नहीं होती। नींद की कमी, तनाव, पानी की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं। यदि सिरदर्द बार-बार हो, असामान्य रूप से तेज हो या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लें।
5. एलर्जी और अस्थमा की परेशानी बढ़ना
जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा है, उन्हें प्रदूषण बढ़ने पर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। छींक आना, नाक बहना, खांसी और सांस में घरघराहट जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार निर्धारित दवाओं और इनहेलर का इस्तेमाल करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं की खुराक में बदलाव न करें।
प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये 5 उपाय
वायु प्रदूषण के असर को कम करने के लिए कुछ सावधानियां उपयोगी हो सकती हैं। सबसे पहले बाहर निकलने या व्यायाम करने से पहले AQI की जांच करें। हवा खराब होने पर खुले स्थान में तेज कसरत करने से बचें और घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज करें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष रेस्पिरेटर इस्तेमाल करें। घर में धुआं कम करने, रसोई में एग्जॉस्ट चलाने और जरूरत के अनुसार एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने पर भी ध्यान दें। पर्याप्त नींद लें, पानी पीते रहें और फल-सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार अपनाएं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
प्रदूषण के दौरान लगातार खांसी, बढ़ती घरघराहट या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर सांस की तकलीफ या सीने में दर्द होने पर आपातकालीन मदद लेने में देरी न करें। AQI पर नजर रखें और हवा की स्थिति के अनुसार अपनी दिनचर्या में बदलाव करें।
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