Droupadi Murmu Bastar Visit : छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित ऐतिहासिक मुरिया दरबार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न्याय व्यवस्था, आदिवासी संस्कृति और क्षेत्र के विकास को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। शुक्रवार को बस्तर दशहरा की परंपरा में शामिल होते हुए उन्होंने अदालतों और थानों में मामलों के निपटारे में लगने वाले लंबे समय पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में न्याय मिलने में दस, बीस और तीस साल तक लग जाते हैं। ऐसे में आदिवासी समाज की पारंपरिक विवाद समाधान व्यवस्था से सीख लेने की जरूरत है।

मां दंतेश्वरी के दर्शन के बाद मुरिया दरबार पहुंचीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को जगदलपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने सबसे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद वह सिरासार भवन स्थित मुरिया दरबार में शामिल हुईं। यहां उन्होंने मांझी और चालकी सहित पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधियों से संवाद किया। प्रतिनिधियों ने उन्हें मुरिया दरबार के ऐतिहासिक महत्व, आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और वनांचल में प्रचलित सामाजिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। राष्ट्रपति ने उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और इस पारंपरिक व्यवस्था से अपने पारिवारिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं भी मांझी की बेटी हूं।”

मांझी से परगना तक विवाद सुलझाने की परंपरा
राष्ट्रपति ने बताया कि आदिवासी समाज में गांव के मांझी विवाद से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनकर समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। यदि गांव में सहमति नहीं बनती, तो मामला पीड़ परगना और फिर देश परगना तक पहुंच सकता है। गंभीर मामलों में कई दिनों तक चर्चा और विचार-विमर्श किया जाता है। उन्होंने इस व्यवस्था को आदिवासी समाज की पारंपरिक समझ और सामुदायिक सहमति का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, समाज की इस विरासत में विवाद सुलझाने और लोगों को साथ लेकर चलने की महत्वपूर्ण सीख छिपी है।
विकास के साथ आदिवासी संस्कृति बचाने का आह्वान
राष्ट्रपति मुर्मु ने जनजातीय समाज से शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों को अपनाने के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि परंपराएं और सामाजिक मूल्य किसी समुदाय की विशिष्ट पहचान होते हैं। इसलिए आधुनिकता की ओर बढ़ते हुए अपनी विरासत को भुलाना नहीं चाहिए। मुरिया दरबार जैसे आयोजन जनजातीय इतिहास, सामुदायिक एकता और पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
माओवादी हिंसा से मुक्ति और विकास पर राष्ट्रपति का संदेश
राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा से मुक्ति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही माओवाद की जड़ों और समाज पर उसके प्रभाव को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आदिवासी समाज से अपने गांव, समुदाय और भविष्य के बारे में निर्णय लेने तथा अशांति फैलाने वाली ताकतों का एकजुट होकर सामना करने का आह्वान किया।

जनजातीय परंपराओं में भगवान श्रीराम से जुड़ाव
द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को रामायण के दंडकारण्य प्रसंग से जोड़ते हुए भगवान श्रीराम, माता सीता और माता शबरी के आदर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आस्था और परंपराएं भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। लोगों के नामों और स्थानीय मान्यताओं में भी राम से जुड़ाव दिखाई देता है। उन्होंने समाज को श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया बस्तर के विकास का रोडमैप
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बस्तर पंडुम और बस्तर ओलिंपिक जैसे आयोजनों को इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। मुख्यमंत्री ने सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार बस्तर को विकास की अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए प्रयासरत है। राष्ट्रपति के संदेश और मुख्यमंत्री के वक्तव्य ने क्षेत्र में शांति, सांस्कृतिक संरक्षण और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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