NEET UG 2026 Paper Leak : देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 (NEET UG-2026) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। परीक्षा के संचालन में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की गंभीर शिकायतों के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर के विभिन्न राज्यों से 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई की इस त्वरित कार्रवाई ने परीक्षा माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया है। इस मामले की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है, क्योंकि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।

शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर: गंभीर धाराओं में केस
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 12 मई 2026 को हुई, जब शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने सीबीआई को एक विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी। इस शिकायत में नीट यूजी-2026 परीक्षा के दौरान हुई धांधली और प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता अंदेशे जताए गए थे। सीबीआई ने बिना समय गंवाए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। एफआईआर में न केवल आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं, बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और हाल ही में लागू हुए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स प्रिवेंशन) एक्ट 2024’ की कड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं।
तीन राज्यों में छापेमारी: जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से हुई गिरफ्तारियां
सीबीआई की विशेष टीमों ने सूचना तंत्र और तकनीकी इनपुट के आधार पर राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान जयपुर से 3, गुरुग्राम से 1 और नासिक से 1 आरोपी को हिरासत में लिया गया। इन आरोपियों पर पेपर लीक नेटवर्क का हिस्सा होने और छात्रों से मोटी रकम वसूलने का संदेह है। जांच एजेंसी ने बताया कि इन आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकते हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों से फिलहाल गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद
तलाशी अभियान केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रहा; सीबीआई ने संदिग्धों के ठिकानों से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य भी एकत्र किए हैं। छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, कई ऐसे आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं जो सीधे तौर पर प्रश्नपत्रों के अवैध वितरण की ओर इशारा करते हैं। इन डिवाइसों को अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा और व्हाट्सएप चैट के जरिए पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा खोला जा सके।
राजस्थान एसओजी के साथ समन्वय और तकनीकी फॉरेंसिक विश्लेषण
सीबीआई इस हाई-प्रोफाइल मामले में अकेले काम नहीं कर रही है। वह राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के साथ भी लगातार तालमेल बिठा रही है, जिसने शुरुआती स्तर पर इस मामले की जांच की थी। दोनों एजेंसियां सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही हैं ताकि कड़ियों को जोड़ा जा सके। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि वे तकनीकी और फॉरेंसिक विश्लेषण का सहारा ले रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का स्रोत क्या था और इसे डिजिटल माध्यम से कैसे फैलाया गया।
निष्पक्ष जांच का भरोसा: छात्रों के भविष्य की सुरक्षा प्राथमिकता
सीबीआई ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की जांच अत्यंत निष्पक्ष, व्यापक और पेशेवर तरीके से कर रही है। एजेंसी का लक्ष्य न केवल छोटे मोहरों को पकड़ना है, बल्कि उस मुख्य सरगना तक पहुंचना है जिसने इस पूरी धांधली की पटकथा लिखी। शिक्षा मंत्रालय और जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो। आगामी दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि जांच का दायरा अब अन्य राज्यों तक भी फैल रहा है।

















