Chhattisgarh CSMCL Scam : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चर्चित CSMCL (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ओवरटाइम भुगतान घोटाले में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए CDL के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केटिंग) एन. उदय राव को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उदय राव इस पूरे घोटाले की एक अहम कड़ी हैं, जो पर्दे के पीछे से भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट को संचालित कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी से इस घोटाले के कई और गहरे राज खुलने की संभावना जताई जा रही है।

ओवरटाइम और बोनस के नाम पर 182.98 करोड़ का भारी हेरफेर
जांच एजेंसियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 के बीच मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों को नियम विरुद्ध तरीके से करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, कुल 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। इसमें से अकेले ओवरटाइम के नाम पर 101.20 करोड़ रुपए और बोनस के रूप में 12.21 करोड़ रुपए बांटे गए। इतना ही नहीं, अतिरिक्त चार दिनों के काम के बदले 54.46 करोड़ रुपए और इन भुगतानों पर लगने वाले सर्विस चार्ज व टैक्स के नाम पर 15.11 करोड़ रुपए की चपत सरकारी खजाने को लगाई गई।
फर्जी बिलिंग का मास्टरमाइंड: उदय राव, त्रिपाठी और ढेबर का कनेक्शन
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ओवरटाइम और बोनस की पूरी बिलिंग प्रक्रिया उदय राव के इशारों पर चलती थी। एजेंसियों का दावा है कि उदय राव सीधे तौर पर अरुणपति त्रिपाठी के संपर्क में थे। अरुणपति त्रिपाठी के निर्देशों के आधार पर ही कमीशन की बड़ी राशि तय की जाती थी। आरोप है कि फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बनाए गए बिलों के माध्यम से निकाली गई यह रकम अंततः अनवर ढेबर तक पहुंचाई जाती थी। यह एक सुनियोजित सिंडिकेट था, जिसमें अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच मिलीभगत के जरिए करोड़ों रुपए का गबन किया गया।
ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस का मुखौटा और बैकडोर से संचालन
रिकॉर्ड के अनुसार, CSMCL में मैनपावर सप्लाई का ठेका ‘ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड’ के नाम पर था। लेकिन जांच में सामने आया कि इसका वास्तविक नियंत्रण एन. उदय राव के पास था। वे CDL से जुड़ी कंपनी ‘एनकेजेए’ के माध्यम से फील्ड मैनेजमेंट, बिलिंग और कर्मचारियों की व्यवस्था का सारा काम देख रहे थे। इस घोटाले में केवल ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस को ही लगभग 34.07 करोड़ रुपए का अतिरिक्त और अनुचित भुगतान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा सुमीत फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स और ईगल हंटर जैसी कई अन्य एजेंसियां भी जांच के दायरे में हैं।
अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका और न्यायिक कार्रवाई का सिलसिला
घोटाले के मुख्य किरदारों में से एक अरुणपति त्रिपाठी पूर्व में आबकारी विभाग के विशेष सचिव और CSMCL के एमडी रह चुके हैं। मूल रूप से इंडियन टेलीकॉम सर्विस के अधिकारी त्रिपाठी पर शराब घोटाले में भी संलिप्तता के आरोप हैं। हालांकि, हाल ही में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ PMLA कोर्ट के संज्ञान को रद्द कर दिया था, लेकिन वे लंबे समय से न्यायिक रिमांड पर जेल में थे। वर्तमान में, इस मामले में पहले से गिरफ्तार सात अन्य आरोपियों की पुलिस रिमांड समाप्त होने के बाद, विशेष न्यायालय ने उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है।
भ्रष्टाचार के सिंडिकेट पर कसेगा शिकंजा: आगे की जांच जारी
EOW-ACB का कहना है कि यह केवल धन का दुरुपयोग नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है। कर्मचारियों के हक के पैसे को फर्जी बिलों के जरिए निकालकर सिंडिकेट को कमीशन के तौर पर दिया गया। जांच एजेंसियां अब उन सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही हैं, जिनसे इस अवैध लेन-देन की पुष्टि हो सके। आने वाले दिनों में कुछ और प्रभावशाली लोगों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह लड़ाई पूरी पारदर्शिता के साथ जारी रहेगी।

















