Judicial Accountability : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावों में कथित धांधली और वोट चोरी के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने अब न्यायपालिका के कुछ जजों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बिना किसी न्यायाधीश का नाम लिए आरोप लगाया कि कई जजों ने देश के साथ विश्वासघात किया है और संविधान के साथ धोखा किया है।

26 अक्टूबर को एक्स पर साझा की पोस्ट
सौरव दास ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने दिल्ली में मंगलवार को आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में लोगों से शामिल होने की अपील की। कार्यक्रम का विषय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की जवाबदेही है। दास ने अपने संदेश में न्यायाधीशों की जवाबदेही को मौजूदा समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

जजों की जवाबदेही को समय की मांग बताया
अपने पोस्ट में सौरव दास ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में न्यायाधीशों की जवाबदेही पर चर्चा बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जजों ने देश और संविधान के साथ विश्वासघात किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी जवाबदेही उचित समय पर तय की जाएगी। हालांकि, पोस्ट में उन्होंने किसी विशेष न्यायाधीश का नाम नहीं लिया और न ही आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट मामला बताया।
दिल्ली के कार्यक्रम में शामिल होंगे पूर्व जज एएस ओका
जिस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील सौरव दास ने की है, उसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस ए. एस. ओका मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम में न्यायपालिका की जवाबदेही, संवैधानिक व्यवस्था और न्यायाधीशों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह आयोजन न्यायिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़े सवालों को सार्वजनिक विमर्श में लाने का अवसर माना जा रहा है।
कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण भी होंगे शामिल
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण सहित कई अन्य वक्ताओं के पैनल चर्चा में भाग लेने की जानकारी दी गई है। न्यायपालिका की जवाबदेही का मुद्दा कानूनी और संवैधानिक बहस का हिस्सा रहा है। ऐसे में कार्यक्रम में अलग-अलग वक्ताओं के विचारों के जरिए न्यायिक संस्थाओं की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर चर्चा हो सकती है।

तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद नया बयान
सौरव दास हाल ही में एक सप्ताह से अधिक समय तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में रहे थे। खबर के मुताबिक, उनकी हिरासत का संबंध CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले से था। रिहाई के बाद अब उनका बयान न्यायपालिका की जवाबदेही पर केंद्रित है। हालांकि, उनके हालिया बयान और पहले के विरोध प्रदर्शनों के बीच संबंध को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
अदालतों पर पहले भी टिप्पणी कर चुके हैं दास
सौरव दास इससे पहले भी अदालतों और न्यायिक व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणियां करते रहे हैं। CJP के गठन के बाद से संगठन से जुड़े बयानों में संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा है। फिलहाल, न्यायाधीशों पर लगाए गए ताजा आरोप सौरव दास के व्यक्तिगत बयान के रूप में सामने आए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।

